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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : दृष्टिहीन लोगों के जीवन में उजाला लाने और नेत्रदान के प्रति समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिए शनिवार को सुपौल में एक विशेष जनजागृति पदयात्रा का आयोजन किया गया। दधीचि देहदान समिति तथा बिहार प्रादेशिक मारवाड़ी महिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों ने हिस्सा लिया। पदयात्रा के जरिए लोगों से मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।

पदयात्रा के बाद व्यापार संघ में आयोजित हुआ जागरूकता सम्मेलन

Supaul शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए जनजागृति पदयात्रा का समापन व्यापार संघ भवन में हुआ, जहाँ एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यहाँ उपस्थित वक्ताओं ने नेत्रदान की संपूर्ण प्रक्रिया और इसके मानवीय महत्व पर प्रकाश डाला। आयोजकों ने बताया कि सही समय पर किया गया नेत्रदान किसी अंधेरे से जूझ रहे व्यक्ति के जीवन में नया प्रकाश भर सकता है।

रक्तदान की तरह नेत्रदान भी महादान: जिलाधिकारी सावन कुमार

Supaul कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला अधिकारी (DM) सावन कुमार ने कहा कि रक्तदान की भांति ही नेत्रदान भी मानव सेवा का सबसे उत्तम कार्य है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपनी झिझक छोड़कर इस पुनीत कार्य के लिए आगे आना चाहिए। डीएम ने प्रशासनिक स्तर पर भी ऐसे जागरूकता अभियानों को लगातार बढ़ावा देने का आश्वासन दिया और युवाओं से इस मुहिम से जुड़ने की अपील की।

सामाजिक संस्थाओं ने समाज को एकजुट होकर संकल्प लेने का दिया संदेश

Supaul सम्मेलन में उपस्थित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि नेत्रदान केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक समाज का हर वर्ग इस पहल से नहीं जुड़ेगा, तब तक ज़रूरतमंदों तक मदद पहुंचाना संभव नहीं होगा। अंत में दर्जनों लोगों ने मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लिया।

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