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रिपोर्टर: अरविन्‍द सिंह

Bhopal : राज्य में हाल ही में उजागर हुए फर्जी पासपोर्ट रैकेट के बाद भोपाल नगर निगम प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। हाल ही में एसटीएफ (STF) की टीम ने नगर निगम की जन्म-मृत्यु शाखा में दबिश देकर फर्जी मोहरों से बनाए गए प्रमाण पत्रों की पड़ताल की थी। इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए निगम ने कार्यालय में बाहरी एजेंटों (दलालों) के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

संदिग्ध सॉफ्टवेयर व फर्जी मोबाइल ऐप्स पर कस रहा पुलिस और निगम का शिकंजा

Bhopal मामले की गंभीरता को देखते हुए निगम अधिकारी उन तकनीकी माध्यमों और मोबाइल एप्लीकेशनों की गहन जांच कर रहे हैं, जिनके जरिए महज मामूली शुल्क देकर जाली दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। पूर्व में भी नगर निगम ने एक ऐसे ही फर्जी ऐप का पर्दाफाश किया था, जिससे नकली सर्टिफिकेट बनाए जा रहे थे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अब दलालों के पूरे नेटवर्क और डिजिटल ऐप प्लेटफार्मों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

पुराने प्रमाण पत्रों के सत्यापन का काम सख्त, संदिग्ध मिलने पर होगी कानूनी कार्रवाई

Bhopal जन्म-मृत्यु पंजीयन शाखा के रजिस्ट्रार सत्यप्रकाश बड़गेयां ने कार्यालय के कर्मचारियों को निर्देश जारी किए हैं कि संशोधन या प्रतिलिपि के लिए आने वाले किसी भी पुराने दस्तावेज को बिना गहन जांच के मान्य न किया जाए। यदि जांच प्रक्रिया के दौरान कोई भी दस्तावेज जाली या संदेहास्पद प्रतीत होता है, तो उसकी तुरंत सूचना स्थानीय पुलिस को दी जाएगी।

तहसीलदारों से क्रास-चेक होंगे विलंबित मामलों की अनुमति पत्र

Bhopal एक माह से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए नियमानुसार तहसीलदार की अनुमति आवश्यक होती है। कई मामलों में फर्जी अनुमति पत्रों के इस्तेमाल की आशंका को देखते हुए नगर निगम ने अब संबंधित तहसीलदारों को पत्र भेजकर क्रॉस-वेरिफिकेशन (आपसी मिलान) शुरू कर दिया है। इसके अलावा, पूर्व में आरटीआई कार्यकर्ता के नाम पर जाली दस्तावेज बनाने वाले एजेंटों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।

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