रिपोर्टर: खुशबू रावत
Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की चोरी का मामला लगातार गहराता जा रहा है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक तफ्तीश में एक नया और चौंकाने वाला नाम सामने आया है—फूलकांत मिश्रा। कभी एक छोटी सी दुकान में रत्न-नग बेचने और ज्योतिष का काम करने वाला फूलकांत आज आलीशान बंगले और चार-चार लक्ज़री गाड़ियों का मालिक है।
इस बीच, रविवार शाम SIT की टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर पिछले 6 दिनों में हुई 60 घंटे की सघन पूछताछ की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में फिलहाल किसी बड़े पदाधिकारी का सीधा नाम नहीं है, लेकिन पैसे की गिनती, आभूषणों के रख-रखाव और सुरक्षा सिस्टम की गंभीर खामियों को उजागर किया गया है। पूरी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सामने आएगी।
Ram Mandir Donation Scam आभूषणों की जिम्मेदारी और चंपत राय से नजदीकियां
जांच के केंद्र में इस समय रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के बाद फूलकांत मिश्रा का नाम सबसे ऊपर है। रामशंकर के पास जहाँ चढ़ावे के पैसों का जिम्मा था, वहीं फूलकांत मिश्रा मंदिर के बहुमूल्य आभूषणों की देखरेख और उनके रख-रखाव से जुड़ा हुआ था। टिन्नू की ही तरह फूलकांत को भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का बेहद करीबी माना जाता है। मंदिर के उन प्रतिबंधित और संवेदनशील हिस्सों में भी फूलकांत की बेरोक-टोक आवाजाही थी, जहाँ आम लोगों का जाना पूरी तरह वर्जित है।
Ram Mandir Donation Scam विरोधाभासों में घिरा परिवार का दावा
फूलकांत मिश्रा के भाई साकेत मिश्रा अयोध्या रेलवे स्टेशन के पास ‘साकेत रत्न’ नाम से बड़ी दुकान चलाते हैं और उनका दावा है कि उनका सालाना टर्नओवर करोड़ों का है। हालांकि, इस मामले में परिवार के बयानों में भारी विरोधाभास देखने को मिल रहा है:
- दखलअंदाज़ी: भाई का दावा है कि फूलकांत मंदिर के प्रबंधन में शामिल नहीं हैं और अंदर भी नहीं जाते, जबकि फूलकांत की मंदिर के भीतर की तस्वीरें मौजूद हैं।
- गाड़ियों का रहस्य: भाई ने कहा कि उनकी लग्जरी गाड़ियों का मंदिर से कोई वास्ता नहीं है, लेकिन फूलकांत के भतीजे का बयान इसके ठीक उलट है कि उनकी गाड़ियां राम मंदिर के काम में चलती हैं।
- मैनेजमेंट: जहाँ परिवार किसी भी भूमिका से इनकार कर रहा है, वहीं जांच में साफ हुआ है कि फूलकांत सीधे तौर पर दान-दक्षिणा के प्रबंधन तंत्र का हिस्सा था।
Ram Mandir Donation Scam यात्री सेवा केंद्र का कर्मचारी सोमेश भी रडार पर
इस पूरे सिंडिकेट में तीसरा नाम सोमेश आनंद का सामने आया है, जो राम मंदिर के यात्री सेवा केंद्र में तैनात है। सोमेश पर चंदे की बड़ी रकम लेकर फरार होने का आरोप लगा था, लेकिन उसने इन आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि वह अयोध्या में ही मौजूद है और जांच पूरी होने के बाद ही मीडिया के सामने अपना पक्ष रखेगा।
SIT ने अपनी रिपोर्ट में बैंक तक पैसे ले जाने के तरीके, लॉकर की डुप्लिकेट चाबियां न होने और सोने-चांदी के मूल्यांकन की व्यवस्था पर कड़े सवाल उठाए हैं। अब तक 150 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जिनमें से 25 कर्मचारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई है। एहतियात के तौर पर, संदिग्ध कर्मियों और ट्रस्ट के संबंधित पदाधिकारियों के अयोध्या से बाहर जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
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