रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Raipur : छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कंपनियों के मालिकों और उच्च अधिकारियों की फर्जी व्हाट्सएप आईडी (WhatsApp ID) बनाकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। शातिर ठगों ने रसूखदार कंपनियों के अकाउंटेंट्स को अपना निशाना बनाते हुए कुल 2.93 करोड़ रुपये की चपत लगाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
दो बड़ी कंपनियों को बनाया निशाना, अकाउंटेंट को झांसे में लेकर ट्रांसफर कराए 2.93 करोड़
Raipur गिरोह ने रायपुर की दो प्रतिष्ठित कंपनियों को अपने जाल में फंसाया। पहली घटना टिकरापारा थाना क्षेत्र की है, जहाँ ‘राठी बंधुस’ के निदेशक के नाम का फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर अकाउंटेंट से 93 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। वहीं दूसरी घटना तेलीबांधा थाना क्षेत्र की है, जहाँ ‘ट्रांसफॉर्मर एंड ट्रांसमिशन लिमिटेड’ के अधिकारी के नाम पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर 2 करोड़ रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली गई।
महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश से दबोचे गए शातिर साइबर ठग
Raipur मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी और साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। पुलिस ने महाराष्ट्र के ठाणे (उल्हासनगर) से तीन आरोपियों—आकाश कन्हैया लाल चुथ, साहिल रमेश नथानी और राज चन्दर लाल जुमानी को गिरफ्तार किया। इनके पास से मोबाइल फोन, नकदी और एटीएम कार्ड बरामद हुए। इसके अलावा तेलीबांधा मामले में यूपी के प्रयागराज से विनय श्रीवास्तव और विनोद कुमार को भी दबोचा गया।
करोड़ों की राशि होल्ड, पुलिस खंगाल रही गिरोह का पूरा नेटवर्क
Raipur जांच में यह बात सामने आई है कि टिकरापारा मामले में पकड़े गए तीनों आरोपी तेलीबांधा की 2 करोड़ की ठगी में भी शामिल थे। पुलिस ने त्वरित एक्शन लेते हुए विभिन्न बैंकों में कार्रवाई करते हुए कुल 1 करोड़ 38 लाख रुपये (टिकरापारा केस से 24 लाख और तेलीबांधा केस से 1.14 करोड़) होल्ड करा दिए हैं। फिलहाल, पुलिस जब्त मोबाइल और खातों की फॉरेंसिक जांच कर गिरोह के अन्य सहयोगियों की तलाश में जुटी हुई है।
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