रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Raipur : राजधानी रायपुर में गौठानों की बदहाल व्यवस्था और लंबित भुगतानों को लेकर गौठान संचालकों ने अनोखा और कड़ा रुख अपनाया है। संचालक अपनी गायों को लेकर सीधे नगर निगम मुख्यालय पहुंच गए, जहां उन्होंने निगम प्रशासन और कमिश्नर विश्वदीप के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। संचालकों का आरोप है कि गौठानों में क्षमता से अधिक मवेशी होने के बावजूद उनके लिए चारे और पानी की उचित व्यवस्था नहीं है, जिससे पशुओं और संचालकों दोनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एक गाय पर 27 रुपए का खर्च और 30 लाख का बकाया दावा
Raipur प्रदर्शन कर रहे संचालकों का मुख्य दर्द वित्तीय संकट से जुड़ा हुआ है। उनका कहना है कि नगर निगम द्वारा एक गाय के रखरखाव के लिए प्रतिदिन मात्र 27 रुपए दिए जाते हैं। इतनी कम राशि में मवेशियों के लिए पौष्टिक चारा, साफ पानी और अन्य जरूरी प्रबंध करना असंभव है। संचालकों ने दावा किया कि पिछले छह महीनों से उनका लगभग 30 लाख रुपए का भुगतान अटका हुआ है, जिसके लिए कई बार आवेदन देने के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला है। भुगतान न मिलने के कारण अब गौठानों का संचालन करना लगभग बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
सड़कों पर भटकते मवेशी और संचालकों की चार प्रमुख मांगें
Raipur गौठान संचालकों ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उचित देखरेख और संसाधनों के अभाव में राजधानी के कई गौठान बंद पड़े हैं। परिणामस्वरुप, भूखे-प्यासे मवेशी सड़कों पर भटकने और पॉलीथीन खाने को मजबूर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। इस स्थिति से परेशान होकर संचालकों ने नगर निगम प्रशासन के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
- बंद पड़े सभी गौठानों को तत्काल प्रभाव से दोबारा शुरू किया जाए।
- मवेशियों के लिए चारे और पानी की स्थायी व समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- पिछले छह महीने से लंबित करीब 30 लाख रुपए के बकाए का तुरंत भुगतान किया जाए।
- नगर निगम कमिश्नर गौठानों की जमीनी हकीकत पर स्पष्ट जवाब दें।
संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे गौठानों में ताला लगाकर चाबियां कमिश्नर को सौंप देंगे और उग्र आंदोलन करेंगे।
जमीनी हकीकत और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का इंतजार
Raipur इस पूरे प्रदर्शन के बीच गौठानों की वास्तविक स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों और रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ जगहों पर गौठानों की व्यवस्था सामान्य भी दिखाई देती है, जिससे संचालकों के दावों और जमीनी हकीकत की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है। हालांकि, कागजी दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और मवेशियों की स्थिति की गहन जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, इस बड़े प्रदर्शन के बाद नगर निगम प्रशासन क्या कदम उठाता है और लंबित भुगतानों पर उसका क्या रुख रहता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
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