Iran-US Crises : मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिससे क्षेत्र में भारी तनाव है। सीजफायर होने के बावजूद दोनों देशों के बीच किसी स्थायी शांति समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर बड़ा सैन्य हमला करने की पूरी तैयारी कर चुका था, लेकिन कुछ प्रमुख अरब देशों की मध्यस्थता और गुजारिश के बाद फिलहाल इस योजना को रोक दिया गया है।
Iran-US Crises ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर किया बड़ा खुलासा, अरब नेताओं से बातचीत का दिया हवाला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। ट्रंप ने बताया कि कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने उनसे व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया था। इन शीर्ष अरब नेताओं ने ट्रंप से ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टालने की अपील की। नेताओं का तर्क है कि इस समय पर्दे के पीछे गंभीर कूटनीतिक बातचीत चल रही है, जिससे जल्द ही एक ऐसा समझौता निकल सकता है जो अमेरिका और पूरे मिडिल ईस्ट को स्वीकार्य हो।
Iran-US Crises परमाणु हथियारों पर कोई समझौता नहीं, सेना को ‘रेडी-टू-अटैक’ मोड पर रहने के निर्देश
डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसी भी संभावित शांति समझौते की पहली और मुख्य शर्त यही होगी कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि हमला सिर्फ कुछ समय के लिए टाला गया है, इसका मतलब यह कतई नहीं है कि खतरा टल चुका है। उन्होंने अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और सेना को हर पल मुस्तैद रहने और किसी भी समय बड़े पैमाने पर पलटवार के लिए पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। ट्रंप ने कहा कि अगर कूटनीतिक बातचीत नाकाम रहती है, तो अमेरिका कड़े कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
Iran-US Crises वैश्विक बाजार और सुरक्षा पर मंडराया संकट का साया
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस बयान ने मिडिल ईस्ट की नाजुक स्थिति को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी तार्किक नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो इसका सीधा असर वैश्विक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और व्यापारिक मार्गों में असुरक्षा का खतरा पूरी दुनिया को झेलना पड़ सकता है। फिलहाल वैश्विक समुदाय की नजरें अमेरिका, ईरान और मध्यस्थता कर रहे अरब देशों की अगली कूटनीतिक चालों पर टिकी हैं।
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