Mala JaapMala Jaap
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By: Ravindra Singh

Mala Jaap : सनातन परंपरा में मंत्र जाप को मन को एकाग्र करने और आध्यात्मिक साधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। माला के जरिए मंत्रों का जाप करते समय केवल मंत्र उच्चारण ही नहीं, बल्कि माला को पकड़ने और मनके फेरने के भी कुछ नियम बताए गए हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जप करते समय एक विशेष उंगली का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आइए जानते हैं माला जप से जुड़े जरूरी नियम और सावधानियां।

माला जप में किस उंगली का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए?

Mala Jaap धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माला जप करते समय तर्जनी उंगली यानी इंडेक्स फिंगर का प्रयोग नहीं किया जाता है। तर्जनी को अहंकार, अधिकार और निर्देश देने की भावना से जोड़कर देखा जाता है। वहीं मंत्र जाप को मन की शांति और एकाग्रता से जुड़ी साधना माना गया है।

इसी वजह से जप के दौरान तर्जनी उंगली को माला से अलग रखने की परंपरा है। आम तौर पर माला को अनामिका पर टिकाकर अंगूठे और मध्यमा की सहायता से मनकों को आगे बढ़ाया जाता है।

माला को जमीन से स्पर्श न होने दें

Mala Jaap मान्यता है कि मंत्र जाप करते समय माला को जमीन पर नहीं रखना चाहिए और न ही उसे जमीन से स्पर्श होने देना चाहिए। जप के दौरान माला को हाथ में संभालकर रखना उचित माना जाता है।

सुमेरु मनके को पार न करें

Mala Jaap जप की माला में आमतौर पर 108 मनके होते हैं। इसके अलावा एक बड़ा मनका होता है, जिसे सुमेरु कहा जाता है। धार्मिक परंपरा में सुमेरु को पार करके आगे जप करना उचित नहीं माना जाता।

जब जप करते हुए सुमेरु मनके तक पहुंच जाएं तो माला को पलटकर दोबारा उसी दिशा में मनके फेरने की परंपरा है।

गोमुखी से जप करने की परंपरा

Mala Jaap कई साधक माला जप के दौरान गोमुखी नाम की कपड़े की थैली का इस्तेमाल करते हैं। इसमें माला ढकी रहती है और जप करने वाले का ध्यान बाहरी गतिविधियों से कम भटकता है। हालांकि, गोमुखी का इस्तेमाल करना हर परंपरा में अनिवार्य नहीं माना जाता।

स्वच्छता का रखें विशेष ध्यान

Mala Jaap माला जप से पहले शरीर और हाथ-पैर की स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में साफ-सुथरे होकर पवित्र आसन पर बैठकर मंत्र जाप करने को उचित बताया गया है। जप करते समय माला को नाभि से ऊपर और हृदय के आसपास रखने की परंपरा भी बताई जाती है।

किस दिशा में बैठकर करें माला जाप?

Mala Jaap मंत्र साधना के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय विशेष माना जाता है। सूर्योदय से पहले का शांत वातावरण जप और ध्यान के लिए अनुकूल माना गया है। धार्मिक परंपराओं में पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके मंत्र जाप करने की सलाह दी जाती है।

हालांकि, अलग-अलग मंत्र, साधना पद्धतियों और संप्रदायों में नियम अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष साधना के लिए अपने गुरु या संबंधित परंपरा के निर्देशों को प्राथमिकता देना उचित माना जाता है।

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं पर आधारित है। इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी इन मान्यताओं की सत्यता की पुष्टि नहीं करता।

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