by-Ravindra Sikarwar
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में मंगलवार को मूसलाधार बारिश ने शहर को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया। भारी बारिश के कारण प्रमुख सड़कों और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई, जिसने दैनिक जीवन को ठप कर दिया और शहर को “भारत का नया वेनिस” कहलाने के लिए मजबूर कर दिया। प्रशासन ने कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए अलर्ट जारी किया है, जबकि शहरी जल निकासी व्यवस्था की कमियों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
बारिश का प्रभाव:
पिछले 24 घंटों में कोलकाता और आसपास के क्षेत्रों में 150 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से कहीं अधिक है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र और सक्रिय मानसून इस तबाही का कारण बन रहा है। कोलकाता के हावड़ा, साल्ट लेक, दम दम, और बेलियाघाटा जैसे क्षेत्रों में सड़कें नदियों में तब्दील हो गईं, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। कई स्कूलों और कार्यालयों को बंद करना पड़ा, और स्थानीय ट्रेन सेवाएं भी प्रभावित हुईं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया:
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 24/7 कंट्रोल रूम शुरू किया है और जल निकासी पंपों को सक्रिय किया है। हालांकि, शहर की पुरानी जल निकासी प्रणाली इस भारी बारिश का सामना करने में नाकाम रही। कई इलाकों में घुटने तक पानी भर गया, जिससे निवासियों को अपने घरों में कैद होना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में लोग नावों और रिक्शों का उपयोग करते दिखे, जबकि कुछ क्षेत्रों में बच्चे और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना चुनौतीपूर्ण रहा।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों को तेज करना है। जल निकासी व्यवस्था को अपग्रेड करने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाई जा रही है।” राज्य सरकार ने प्रभावित इलाकों में राहत शिविर स्थापित किए हैं और खाद्य सामग्री वितरण शुरू किया है। इसके अलावा, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें भी कोलकाता और आसपास के जिलों में तैनात की गई हैं।
व्यापक प्रभाव:
पश्चिम बंगाल के अन्य हिस्सों, जैसे हुगली, हावड़ा, और उत्तर 24 परगना, में भी भारी बारिश ने तबाही मचाई है। ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को भारी नुकसान की खबरें हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं का परिणाम हो सकती है। कोलकाता में पहले भी जलभराव की समस्या रही है, लेकिन इस बार की बारिश ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
नागरिकों की मांग:
नागरिकों और पर्यावरणविदों ने सरकार से जल निकासी प्रणाली को आधुनिक बनाने और अवैध निर्माण को रोकने की मांग की है, जो नालों और नहरों को अवरुद्ध करते हैं। स्थानीय निवासी रमेश मंडल ने कहा, “हर साल बारिश में कोलकाता डूब जाता है। सरकार को अब स्थायी समाधान ढूंढना होगा।” कुछ नागरिक संगठनों ने जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए हरित बुनियादी ढांचे और बेहतर शहरी नियोजन की वकालत की है।
भविष्य की चेतावनी:
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले दो दिनों तक बारिश जारी रह सकती है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है। कोलकाता के निवासियों से घरों में रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। प्रशासन ने बिजली आपूर्ति को बहाल करने और जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए दिन-रात काम शुरू कर दिया है।
