रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Kanker Nal Jal Yojana failure : छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई महत्वाकांक्षी ‘नल-जल योजना’ खुद ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। वर्ष 2021 से शुरू हुई इस योजना के तहत गांव-गांव में पानी की टंकियां तो खड़ी कर दी गईं और पाइपलाइन भी बिछाई गई, लेकिन छह साल बीत जाने के बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है। जिले के कई गांवों में आज तक लोगों के घरों में एक बूंद पानी भी नल के जरिए नहीं पहुंचा है।
Kanker Nal Jal Yojana failure कागजों पर सिमटी योजना: कहीं सिर्फ पाइप, तो कहीं बिना कनेक्शन के नल
कांकेर जिले के 1,065 गांवों में रहने वाले परिवारों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य के साथ इस योजना पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए। मगर धरातल पर लापरवाही का आलम यह है कि कई जगहों पर सिर्फ आधी-अधूरी पाइपलाइन बिछाकर काम छोड़ दिया गया। कुछ घरों के बाहर नल के ढांचे (टोंटियां) तो लटका दिए गए हैं, लेकिन उनका मुख्य लाइन से कनेक्शन ही नहीं किया गया। वहीं कई गांवों में पानी की विशाल टंकियां तो बनकर तैयार हैं, पर उनमें पानी चढ़ाने के लिए मोटर और बिजली की व्यवस्था तक नहीं की गई है।
Kanker Nal Jal Yojana failure घोटा गांव की हकीकत: आज भी झरने और हैंडपंप ही सहारा
भानुप्रतापपुर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले घोटा गांव की स्थिति इस प्रशासनिक नाकामी की जीती-जागती मिसाल है। यहाँ के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि इस योजना के बाद उन्हें पानी की किल्लत से निजात मिल जाएगी, लेकिन आज भी लोग पीने के पानी के लिए आंगनबाड़ी के बोरवेल, स्थानीय तालाबों और पहाड़ी झरनों पर निर्भर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस बदहाली को लेकर उन्होंने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटे, लेकिन उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले।
Kanker Nal Jal Yojana failure पीएचई विभाग का दावा: 2 साल में पूरा होगा काम, लापरवाह ठेकेदारों पर गिरेगी गाज
इस पूरे मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के अधिकारियों ने अपनी सफाई पेश की है। विभाग के मुताबिक, जिले के कुल 1,065 गांवों में से अब तक केवल 253 गांवों में ही पूरी तरह से पानी की सप्लाई शुरू की जा सकी है। बाकी बचे 812 गांवों में काम अभी भी अधूरा है, जिसे अगले दो साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही विभाग ने आश्वासन दिया है कि जिन ठेकेदारों और एजेंसियों ने काम में लापरवाही बरती है, उनके अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) निरस्त कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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