Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana ScamMukhyamantri Kanya Vivah Yojana Scam
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रिपोर्टर: योगेन्‍द्र सिंह

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana Scam : छत्तीसगढ़ में सरकार की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना’ से जुड़ा एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है। एक सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान गरीब बेटियों को चांदी के बजाय ‘गिल्ट’ (नकली चमकीली धातु) के मंगलसूत्र बांटने का गंभीर आरोप लगा है। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी की शिकायत के बाद जिला कलेक्टर द्वारा गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में शिकायत को सही पाते हुए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक और वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि की गई है, जिसके बाद संबंधित जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) को प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया गया है।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana Scam क्रय नियमों की धज्जियां उड़ाकर की गई नकली आभूषणों की खरीदी

जांच प्रतिवेदन (इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट) के मुताबिक, विवाह सामग्री की खरीद प्रक्रिया में सरकारी नियमों और वित्तीय अनुशासन का खुलकर उल्लंघन किया गया। नियमों को ताक पर रखकर बिना आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति के कोटेशन आमंत्रित किए गए। इतना ही नहीं, क्रय समिति (परचेज कमेटी) के सदस्यों के हस्ताक्षर कराए बिना और सामग्री का भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) किए बिना ही भुगतान की औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं। समिति ने स्पष्ट रूप से शुद्ध चांदी के मंगलसूत्र देने की सिफारिश की थी, लेकिन इसकी जगह घटिया और नकली धातु के आभूषण बांट दिए गए।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana Scam कांग्रेस का पलटवार: बेटियों के सम्मान और सरकारी धन की लूट का आरोप

मामले के उजागर होने के बाद जिला कांग्रेस नेतृत्व ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग को आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि शुरुआती दौर में विभागीय अधिकारियों ने इस योजना को पूरी तरह पारदर्शी और साफ-सुथरा बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की थी, लेकिन अब खुद कलेक्टर की जांच रिपोर्ट ने भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है। विपक्ष ने इसे गरीब बेटियों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने और सरकारी खजाने की खुली लूट का मामला बताते हुए सभी दोषियों को तुरंत निलंबित करने की मांग की है।

Mukhyamantri Kanya Vivah Yojana Scam सचिव को भेजी गई रिपोर्ट, शासन स्तर पर होगी अंतिम कार्रवाई

जांच समिति की रिपोर्ट में वित्तीय नियमों के उल्लंघन और घोर लापरवाही के लिए जिला कार्यक्रम अधिकारी को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना गया है। कलेक्टर ने जांच के इस अंतिम प्रतिवेदन को आगामी सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव को अग्रसारित (फॉरवर्ड) कर दिया है। अब इस पूरे घोटाले में अंतिम गाज गिरना और दोषियों की गिरफ्तारी शासन स्तर से जारी होने वाले आदेशों तथा विभागीय कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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