jeevan Jyoti Bima Yojana Fraudjeevan Jyoti Bima Yojana Fraud
Spread the love

jeevan Jyoti Bima Yojana Fraud:मध्य प्रदेश में केंद्र सरकार की लोकप्रिय सामाजिक सुरक्षा योजना ‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’

में एक बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। शातिर ठगों ने जिंदा लोगों को कागजों में मृत दिखाकर और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्रबनवाकर करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये की बीमा राशि हड़प ली है। इस संगठित सिंडिकेट के खिलाफ मध्य प्रदेश सीआईडी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है

कैसे हुआ 9.5 करोड़ रुपये के इस बड़े घोटाले का पर्दाफाश?

jeevan Jyoti Bima Yojana Fraud:यह पूरा मामला तब सामने आया जब जांच एजेंसियों ने बीमा पॉलिसियों और बैंक खातों के पैटर्न की बारीकी से जांच की। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए:

  • एक जैसे मोबाइल नंबर: अलग-अलग लोगों के बैंक खातों और बीमा फॉर्म्स में एक ही मोबाइल नंबर दर्ज मिले।
  • समान ईमेल आईडी: कई अलग-अलग खाताधारकों के केवाईसी दस्तावेजों में एक ही ईमेल आईडी का इस्तेमाल किया गया था।
  • एक ही नॉमिनी: ज्यादातर मामलों में अलग-अलग बीमा धारकों की पॉलिसियों में एक ही व्यक्ति को नॉमिनी (उत्तराधिकारी) बनाया गया था।
  • असामान्य मौत के पैटर्न: एक ही परिवार के दो से तीन सदस्यों की मौत एक ही हफ्ते या महीने के भीतर दर्शाई गई, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।

‘प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना’ क्या है और कैसे चलता था खेल?

jeevan Jyoti Bima Yojana Fraud:यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को बीमा कवर देने के लिए बनाई गई है, जिसमें मात्र 436 रुपये के सालाना प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है। इस योजना का गलत फायदा उठाने के लिए गिरोह ने निम्नलिखित तरीका अपनाया:

  1. खाता खुलवाना: गिरोह ने ग्वालियर, मुरैना, रतलाम और अन्य शहरों में गरीब लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए और उनके दस्तावेज हासिल किए।
  2. पॉलिसी और प्रीमियम: पीड़ितों की जानकारी के बिना अलग-अलग बीमा कंपनियों में पॉलिसियां ली गईं और शुरुआती 1-2 किश्तें खुद जमा की गईं।
  3. फर्जी मौत का दावा: पॉलिसी लेने के 1 महीने से 1 साल के भीतर बीमित व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से मृत बता दिया गया।
  4. फर्जी प्रमाण पत्र: नगरीय निकायों के कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाए गए।
  5. रकम की निकासी: बीमा क्लेम की पूरी रकम गिरोह के लोगों के खातों में ट्रांसफर करवाई गई और मध्य प्रदेश व राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों (जैसे रतलाम, सवाई माधोपुर) के एटीएम से तुरंत नकद निकाल ली गई।

जांच का दायरा और दूसरे राज्यों तक फैले तार

jeevan Jyoti Bima Yojana Fraud:मध्य प्रदेश सीआईडी की जांच के अनुसार अब तक 121 मामलों में सीधी ठगी की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 482 से अधिक बैंक खाते जांच के दायरे में हैं। गिरोह का जाल इतना फैला हुआ था कि:

  • रतलाम के फेडरल बैंक के 62 खातों से ढाई करोड़ रुपये क्लेम किए गए।
  • 121 पॉलिसी धारकों में से 28 के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र राजस्थान के सवाई माधोपुर से जारी हुए।
  • इसके अलावा इंदौर, छिंदवाड़ा, बेंगलुरु और छत्तीसगढ़ से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।

इस संगठित फर्जीवाड़े ने बैंकिंग प्रणाली और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और सीआईडी इस मामले में गहराई से संलिप्त लोगों की तलाश कर रही है।

read:-बच्चों को भी हो सकता है गठिया, इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज; जानें जुवेनाइल आर्थराइटिस के कारण