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रिपोर्टर: रतन कुमार

Jamtara : झारखंड के जामताड़ा समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) से जालसाजी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ कलेक्ट्रेट में क्लर्क (लिपिक) के पद पर नौकरी ज्वाइन करने पहुंचे एक युवक को जाली दस्तावेजों के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान गिरिडीह जिले के देवरी गांव के रहने वाले रजाक अंसारी के रूप में हुई है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए युवक के साथ आए उसके ससुर अख्तर अंसारी को भी हिरासत में ले लिया है। फिलहाल जामताड़ा थाना पुलिस दोनों से कड़ाई से पूछताछ कर रही है।

आलोक कुमार, उपायुक्त

Jamtara कलेक्ट्रेट कर्मियों को चेकिंग के दौरान हुआ शक, खुली पोल

मिली जानकारी के मुताबिक, रजाक अंसारी अपने ससुर के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय में क्लर्क पद पर अपना योगदान देने (जॉइनिंग के लिए) पहुंचा था। जब स्थापना शाखा के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए फाइलों और दस्तावेजों की जांच शुरू की, तो उन्हें कागजातों की प्रामाणिकता पर गहरा संदेह हुआ। इसके बाद जब जॉइनिंग लेटर की गहनता से कड़ियों को जोड़ा गया, तो पूरा सच सामने आ गया। नियुक्ति पत्र पर जामताड़ा के उपायुक्त (डीसी) के जाली हस्ताक्षर और फर्जी सरकारी मुहर का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ ही उसके पहचान पत्र (पहचान दस्तावेज) और शैक्षणिक डिग्रियों में भी गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं।

Jamtara उपायुक्त आलोक कुमार ने दी पुलिस को शिकायत, कानूनी कार्रवाई शुरू

इस पूरे मामले पर जामताड़ा के उपायुक्त आलोक कुमार ने आधिकारिक पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि एक युवक जिला प्रशासन के अधीन नौकरी का दावा करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा था। विभागीय जांच में उसके द्वारा पेश किया गया जॉइनिंग लेटर पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत पाया गया है। डीसी ने कहा कि इस धोखाधड़ी की सूचना तुरंत जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को दे दी गई है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Jamtara नौकरी के नाम पर मोटी रकम ऐंठने वाले बड़े गिरोह की आशंका

पुलिस के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि युवक के पास से मिले लगभग सभी जरूरी दस्तावेज जाली पाए गए हैं। पुलिस अब इस जांच बिंदु पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि यह फर्जी नियुक्ति पत्र आखिर किसने तैयार किया और इस जालसाजी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को अंदेशा है कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर मोटी रकम वसूलने वाला कोई संगठित अंतरराज्यीय गिरोह इस कांड के पीछे सक्रिय हो सकता है। पुलिस इस मामले में पैसों के लेन-देन (रिश्वत) के एंगल से भी तफ्तीश को आगे बढ़ा रही है।

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