रिपोर्टर: रतन कुमार
Jamtara Driving License Camp : जिला परिवहन विभाग ने आम जनता को बड़ी सहूलियत देते हुए प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर विशेष ड्राइविंग लाइसेंस शिविरों की शुरुआत की है। गुरुवार को जामताड़ा प्रखंड कार्यालय परिसर में इस अभियान का पहला कैंप लगाया गया, जहाँ सुबह से ही आवेदकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य लोगों को जिला मुख्यालय की लंबी कतारों और चक्कर काटने से बचाना है, ताकि वे अपने ही क्षेत्र में आसानी से लाइसेंस प्रक्रिया पूरी कर सकें।
Jamtara Driving License Camp कैंप के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और जरूरी दस्तावेज अनिवार्य
जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) मुकेश कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन के दिशा-निर्देशों के तहत सभी प्रखंडों में क्रमानुसार इन शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। कैंप का लाभ उठाने के लिए आवेदकों को पहले कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी:
- प्रक्रिया: आवेदकों को अपने नजदीकी प्रज्ञा केंद्र या सीएससी (CSC) के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर स्लॉट बुक करना होगा।
- दस्तावेज: आवेदन के समय जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पहचान पत्र और ब्लड ग्रुप की प्रामाणिक जानकारी होना आवश्यक है।
- सत्यापन: ऑनलाइन फीस जमा करने और स्लॉट बुक होने के बाद निर्धारित तिथि पर कैंप में केवल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया जाएगा और प्रक्रिया पूरी होते ही लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा।
Jamtara Driving License Camp सीमित स्लॉट संख्या को लेकर आवेदकों ने जताई नाराजगी
योजना की शुरुआत काफी अच्छी रही, लेकिन पहले ही दिन व्यवस्था को लेकर कई स्थानीय लोगों ने असंतोष व्यक्त किया। कैंप में पहुंचे लोगों का कहना था कि प्रतिदिन के लिए केवल 100 स्लॉट ही निर्धारित किए गए हैं, जिसके कारण दूर-दराज के गांवों से आए सैकड़ों आवेदकों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कैंप के दिनों में आवेदकों की भारी संख्या को देखते हुए डेली स्लॉट की सीमा को बढ़ाया जाए, ताकि इस जन-कल्याणकारी पहल का वास्तविक लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंच सके।
Jamtara Driving License Camp भविष्य में स्लॉट और बुनियादी ढांचा बढ़ाने की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस व्यवस्था में सुधार की वकालत की है। उनका कहना है कि दूर-दराज के आदिवासी बहुल इलाकों से आने वाले लोगों के लिए बार-बार ब्लॉक मुख्यालय आना आर्थिक रूप से नुकसानदेह है। यदि प्रशासन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑन-स्पॉट सत्यापन काउंटरों की संख्या बढ़ा दे, तो प्रतिदिन 100 से अधिक आवेदनों का निपटारा आसानी से किया जा सकता है। इससे विभाग पर अचानक बढ़ने वाला दबाव भी कम होगा और जनता को इस सराहनीय कदम का पूरा फायदा मिलेगा।

