
शिवपुरी: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक बड़े अंतरराज्यीय भू-माफिया गिरोह के सक्रिय होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह गिरोह किसानों और अन्य विवादित सरकारी जमीनों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उन्हें बेचने की साजिश रच रहा था। ताजा मामला शिवपुरी तहसील के गोपालपुर पटवारी हलका स्थित गोलारका गांव का है, जहां भूमाफिया ने धोखाधड़ी करके किसानों की लगभग 150 बीघा जमीन के फर्जी अनुबंध पत्र तैयार कर लिए हैं।
ग्वालियर के सलीम खान की संलिप्तता:
चौंकाने वाली बात यह है कि इस जमीन के फर्जी सौदे को अंजाम देने वाला मुख्य आरोपी सलीम खान ग्वालियर का रहने वाला है। गोलारका गांव में स्थानीय किसानों की बेशकीमती जमीनें हैं। जानकारी के अनुसार, जालसाजों ने प्रत्येक किसान के नाम से जाली अनुबंध पत्र तैयार किए हैं, जिनमें किसानों के फर्जी आधार कार्ड, जाली हस्ताक्षर और नकली तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच:
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लिया है और एक उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही, गोपालपुर पुलिस थाने में भी जालसाजी करके फर्जी अनुबंध पत्र तैयार करने की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसकी पुलिस गहनता से पड़ताल कर रही है।
अनुबंध पत्र में ग्वालियर और शिवपुरी के संदिग्ध:
फर्जी अनुबंध पत्रों में क्रेता के तौर पर सलीम खान और गवाह के रूप में अब्दुल बहीद, दोनों ही ग्वालियर के निवासी बताए गए हैं। जबकि एक अन्य गवाह माखन वर्मा शिवपुरी का है। जिन लोगों को फर्जी किसान दर्शाया गया है, वे शिवपुरी के अलग-अलग गांवों के बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की सच्चाई जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
जिलाधीश का सख्त बयान:
इस संबंध में शिवपुरी के जिलाधीश रवीन्द्र चौधरी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी आरोपी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन इस तरह की भू-माफिया गतिविधियों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
मंदिर, श्मशान और तालाब की 1500 बीघा जमीन के नामांतरण का मामला भी गरमाया:
इसी बीच, शिवपुरी से भाजपा विधायक देवेन्द्र जैन ने जिले के सुरवाया क्षेत्र में वन विभाग, श्मशान और तालाब की लगभग 1500 बीघा जमीन के गलत नामांतरण का मुद्दा उठाया है। विधायक जैन के एक वीडियो के अनुसार, शिवपुरी के अनुभाग अधिकारी उमेश कौरव ने जमीनों के मामलों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एसडीएम ने तालाब की जमीन को भी असिंचित बताकर उसका नामांतरण कर दिया है और एक ही प्रकरण में एक दिन में तीन-तीन निर्णय दिए हैं।
विधायक जैन का दावा है कि 1500 बीघा जमीन के गलत नामांतरण से संबंधित सभी दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं, जिन्हें लेकर वे जल्द ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन से मुलाकात करने वाले हैं। इस मुद्दे पर विधायक जैन पिछले दिनों दिल्ली में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात कर चुके हैं।
अनुभाग अधिकारी पर कार्रवाई:
इस घटनाक्रम के बाद जिलाधीश शिवपुरी ने तत्काल प्रभाव से अनुभाग अधिकारी उमेश कौरव को हटा दिया है। हालांकि, विधायक जैन ने इसे पर्याप्त सजा नहीं मानते हुए कहा कि यह केवल तबादला है। जांच के बाद दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए और वे इस मामले को अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेंगे।
सिंधिया स्टेट की जमीन का विवाद:
शिवपुरी के स्थानीय लोगों के अनुसार, सुरवाया की जिस 1500 बीघा जमीन का नामांतरण किया गया है, वह कभी सिंधिया स्टेट की संपत्ति थी। यह जमीन आंग्रे नामक व्यक्ति के नाम पर दर्ज थी, जिन्होंने इसका नामांतरण नहीं कराया था, जिसके कारण यह विवादित हो गई थी। अब हाल ही में इसका नामांतरण भोपाल की एक फर्म के साथ हो गया है, जिससे इस पूरे मामले में बड़े भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है। विधायक का दावा है कि जमीन से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज उनके पास हैं, जो इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश कर सकते हैं।
शिवपुरी में भू-माफिया गिरोह का सक्रिय होना और सरकारी जमीनों के गलत नामांतरण का मामला सामने आना, जिले में भूमि संबंधी अनियमितताओं की ओर इशारा करता है। प्रशासन द्वारा शुरू की गई उच्च स्तरीय जांच से उम्मीद है कि इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ होगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
