Expired food repackaging racket Delhi : देश की राजधानी दिल्ली में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बहुत बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। दक्षिणी पूर्वी दिल्ली जिला पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह को दबोचा है, जो नामी कंपनियों के एक्सपायर (अवधि पार) हो चुके फूड प्रोडक्ट्स और कोल्ड ड्रिंक्स की एक्सपायरी डेट बदलकर उन्हें दोबारा नए पैकेट में बाजार में उतारता था। पुलिस ने इस मामले में कंपनी के मालिक समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है और मौके से 20 लाख रुपये से अधिक का नकली व मिलावटी सामान जब्त किया है।

Expired food repackaging racket Delhi बाल मजदूरी की सूचना पर गई थी टीम, सामने आया री-पैकेजिंग का काला कारोबार
यह पूरी कार्रवाई ओखला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित ‘वेस्टेंड कॉर्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की कंपनी में हुई। दरअसल, पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी के मार्गदर्शन में बदरपुर के एसडीएम, एफएसएसएआई (FSSAI) और एनजीओ ‘मिशन मुक्ति’ की संयुक्त टीम ने वहां बाल मजदूरी की गुप्त सूचना पर छापेमारी की थी।

रेड के दौरान वहां कोई नाबालिग तो नहीं मिला, लेकिन फैक्ट्री के भीतर का नजारा देखकर अधिकारी दंग रह गए। वहां बड़े पैमाने पर एक्सपायर्ड फूड प्रोडक्ट्स की लेबलिंग बदलने और उन्हें नए सिरे से पैक करने का अवैध धंधा धड़ल्ले से चलाया जा रहा था।
Expired food repackaging racket Delhi थिनर से मिटाते थे पुरानी तारीखें, मैगी और थम्सअप जैसे ब्रांड्स पर जालसाजी
गिरोह का काम करने का तरीका बेहद शातिराना था। आरोपी बाजार से अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ब्रांड्स के उन प्रोडक्ट्स को कौड़ियों के दाम पर खरीद लाते थे जो या तो एक्सपायर होने वाले होते थे या फिर पूरी तरह एक्सपायर हो चुके होते थे।
- केमिकल का इस्तेमाल: ये लोग मशहूर कंज्यूमर प्रोडक्ट्स पर लिखी असली मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को मिटाने के लिए केमिकल थिनर का इस्तेमाल करते थे।
- अत्याधुनिक मशीनें: फैक्ट्री में खास कोडिंग और प्रिंटिंग मशीनें लगाई गई थीं, जिनकी मदद से पैकेटों पर नई तारीखें, फर्जी बारकोड, नया बैच नंबर और मनमाफिक एमआरपी (MRP) दोबारा प्रिंट कर दी जाती थी।
- जब्त सामान: पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में छेड़छाड़ किए गए थम्स अप, फैंटा, बॉर्नविटा, हॉर्लिक्स, पेपर बोट जूस, मैगी नूडल्स और देसी घी के स्टॉक बरामद किए हैं।
Expired food repackaging racket Delhi देशव्यापी बाजार और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर होती थी सप्लाई
जांच में खुलासा हुआ है कि कंपनी का मालिक 70 वर्षीय दर्शन सिंह सचदेवा है। यह गिरोह इन जानलेवा और इंसानों के खाने लायक न बचे प्रोडक्ट्स को चमचमाते रैपरों में पैक करके भारत के विभिन्न थोक बाजारों के साथ-साथ बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर असली बताकर बेचता था।
सरेआम चल रही इस जालसाजी की पुष्टि होने के बाद ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने मिलावट, धोखाधड़ी और जान जोखिम में डालने के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (275, 318(4), 336, 340 और 61(2)) के तहत एफआईआर दर्ज कर मुख्य आरोपी दर्शन सिंह, मैनेजर नितेश भारद्वाज, अकाउंटेंट नरेंद्र और ऑपरेटर कपिल समेत सभी सात लोगों को जेल भेज दिया है।

