रिपोर्टर: सन्तोष सरावगी
Dabra : विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच डबरा नगरपालिका के पार्कों की हालत नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। शहर की 5 लाख से अधिक की आबादी के लिए गिने-चुने पार्क ही मनोरंजन का साधन हैं, लेकिन रखरखाव के अभाव में ये अब कबाड़खाने में तब्दील हो चुके हैं। यहाँ बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूटे पड़े हैं और खुले बिजली के तार मासूमों की जान के लिए खतरा बने हुए हैं।

Dabra कबाड़ में तब्दील हुए झूले: बच्चों के लिए बढ़ा खतरा

डबरा तहसील के प्रमुख पार्कों में कुछ समय पहले तक बच्चों की रौनक हुआ करती थी, लेकिन आज वहाँ लगे झूले पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। फिसलन पट्टियों (स्लाइड्स) की चद्दरें फट चुकी हैं और लोहे के नुकीले हिस्से बाहर निकले हुए हैं। यदि कोई बच्चा अनजाने में इन पर फिसल जाए, तो वह गंभीर रूप से घायल हो सकता है। विडंबना यह है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट आने के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
Dabra सीएमओ आवास के सामने ही अव्यवस्था: जनता में भारी आक्रोश
हैरानी की बात यह है कि नगरपालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) का निवास स्थान पार्क के ठीक सामने है। स्थानीय निवासियों और सुबह योग करने आने वाले लोगों ने कई बार सीएमओ के दरवाजे पर नारेबाजी की और लिखित शिकायतें भी दीं, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूटी। पार्कों में न तो सफाई की व्यवस्था है और न ही पौधों की देखरेख हो रही है, जिससे पार्क की सुंदरता अब ‘कलंक’ बनती जा रही है।
Dabra खुले बिजली के तार: मौत का जाल

पार्कों में बिजली के तारों का खुला होना सबसे बड़ी लापरवाही साबित हो रही है। बच्चों के खेलने की जगह पर जमीन के करीब तक लटकते खुले तार किसी भी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सत्ता पक्ष की परिषद होने के बावजूद डबरा में पार्कों की इस दुर्दशा ने ‘डबल इंजन’ सरकार के विकास के नारों की पोल खोल दी है। जनता अब प्रशासन से जवाब और पार्कों की तत्काल मरम्मत की मांग कर रही है।
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