रिपोर्टर: सन्तोष सरावगी
Dabra : निजी चिकित्सा संस्थानों में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। डबरा स्थित ‘श्री डेंटल केयर एंड क्योर क्लिनिक’ में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ न केवल सरकारी नियमों को ताक पर रखा गया है, बल्कि आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए कोई बुनियादी इंतज़ाम भी नहीं हैं।

Dabra आग से बचाव के कोई साधन नहीं, खतरे में मरीज़
ग्वालियर रोड स्थित इस क्लीनिक का संचालन डॉ. प्रदीप सिंह भदौरिया द्वारा किया जा रहा है। हाल ही में किए गए एक औचक निरीक्षण और मीडिया पड़ताल में यह बात सामने आई कि क्लीनिक में फायर सेफ्टी (अग्निशमन यंत्र) का नामोनिशान तक नहीं है। डेंटिस्ट्री जैसे क्षेत्र में, जहाँ बिजली के हाई-वोल्टेज उपकरणों और रसायनों का निरंतर उपयोग होता है, वहाँ अग्निशमन उपकरणों का न होना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

Dabra डॉक्टर की दलील: “छोटा क्लीनिक है, इसलिए नहीं है सुरक्षा”
जब मीडिया कर्मियों ने सुरक्षा उपकरणों के अभाव पर सवाल उठाए, तो डॉ. भदौरिया ने अपनी लापरवाही स्वीकार की। हालांकि, उनकी दलील चौंकाने वाली थी। उन्होंने कहा कि “यह सिर्फ एक छोटा क्लीनिक है,” जैसे कि छोटे क्लीनिकों में आग लगने या जानमाल के नुकसान का खतरा नहीं होता। प्रशासन के नियम स्पष्ट हैं कि सार्वजनिक रूप से संचालित होने वाले प्रत्येक व्यावसायिक और चिकित्सा संस्थान में फायर एग्जिट और सुरक्षा उपकरण अनिवार्य हैं।
Dabra क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार है?
अस्पतालों और क्लीनिकों में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में ‘श्री डेंटल केयर एंड क्योर’ जैसी लापरवाही प्रशासन की मुस्तैदी पर भी सवालिया निशान लगाती है। क्या विभाग की टीम केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त है?
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