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रिपोर्टर: सन्‍तोष सरावगी

Dabra : ग्वालियर जिले के डबरा में सिंधु नदी के समीप स्थित सीएम राइज स्कूल के हॉस्टल परिसर से नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाला मामला प्रकाश में आया है। जानकारी के अनुसार, जो छात्रावास बच्चों के रहने और उनकी शिक्षा के लिए आरक्षित हैं, उनमें पिछले एक साल से एक ठेकेदार और उसके मजदूरों ने अपना ठिकाना बना रखा है। सरकारी संपत्ति का इस तरह निजी उपयोग न केवल अवैध है, बल्कि विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

Dabra छात्रावास बना मजदूरों का बसेरा, एसी और भारी मशीनरी भी तैनात

हैरानी की बात यह है कि ठेकेदार के लोग न केवल इन कमरों में रह रहे हैं, बल्कि उन्होंने वहां अपनी सुविधा के लिए एयर कंडीशनर (AC) तक लगवा लिए हैं। हॉस्टल के कमरों का उपयोग गोदाम के रूप में किया जा रहा है, जहाँ निर्माण कार्य से संबंधित भारी मटेरियल और सरिया रखा हुआ है। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनों और सरिया काटने के लिए स्कूल की बिजली का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को सीधा आर्थिक नुकसान पहुँच रहा है।

Dabra प्राचार्य पर ₹50,000 महीना लेने के गंभीर आरोप

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद स्कूल के प्राचार्य राकेश सिंह तोमर की भूमिका को लेकर है। सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, ठेकेदार द्वारा हॉस्टल के अवैध उपयोग के बदले प्राचार्य को कथित तौर पर 50,000 रुपये प्रति माह की रिश्वत दी जा रही है। आरोप है कि इसी साठगांठ के चलते बिना किसी उच्चाधिकारी की अनुमति के छात्रावास को ठेकेदार के हवाले कर दिया गया है।

Dabra बच्चों की सुविधाओं से खिलवाड़ और प्रशासन की चुप्पी

सीएम राइज स्कूल सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करना है। लेकिन यहाँ हॉस्टल में बाहरी लोगों की मौजूदगी और निर्माण सामग्री के जमावड़े से स्कूल का शैक्षणिक माहौल प्रभावित हो रहा है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने मांग की है कि इस भ्रष्टाचार और अवैध कब्जे की उच्च स्तरीय जांच की जाए और दोषी प्राचार्य व ठेकेदार के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

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