रिपोर्टर: राजीव कुमार
Chhatarpur : मध्य प्रदेश के छतरपुर विश्वविद्यालय में इन दिनों कथित प्रशासनिक लापरवाही, बढ़ते भ्रष्टाचार, जर्जर भवनों और शिक्षकों की भारी कमी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है।शुक्रवार को छात्र नेताओं ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए कॉलेज चौराहे से लेकर विश्वविद्यालय परिसर तक आंखों पर काली पट्टी बांधकर दंडवत यात्रा निकाली। छात्रों का यह अनुशासित लेकिन कड़ा विरोध प्रदर्शन विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के सामने छह सूत्रीय मांगें रखते हुए समस्याओं के समाधान के लिए दो दिन का अल्टीमेटम दिया है और चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे तालाबंदी कर आंदोलन को और तेज करेंगे।
जर्जर भवनों की बदहाली और विद्यार्थियों की सुरक्षा पर संकट
Chhatarpur छात्र नेताओं ने विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि करीब दो साल पहले लाखों रुपए की लागत से बनाए गए कर्मशाला और आलेख भवन की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। इन भवनों की दीवारों और छतों की जर्जर हालत के कारण यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा पर लगातार खतरा मंडरा रहा है। छात्रों की मुख्य मांग है कि इन भवनों की तकनीकी जांच कराई जाए और तत्काल प्रभाव से इनकी मरम्मत व मजबूती का काम शुरू किया जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
शिक्षकों के रिक्त पद और पढ़ाई पर पड़ रहा बुरा असर
Chhatarpur प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अध्यापन कार्यों में आ रही बाधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनके अनुसार, विश्वविद्यालय में पहले लगभग 110 अतिथि विद्वान अपनी सेवाएं दे रहे थे, जिनकी संख्या घटकर अब महज 40 से 45 रह गई है। इसके अलावा, असिस्टेंट प्रोफेसर के 40 से अधिक पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिन पर अब तक कोई भर्ती नहीं की गई है। शिक्षकों की इस भारी कमी के कारण नियमित कक्षाएं और विद्यार्थियों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटका नजर आ रहा है।
भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
Chhatarpur असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी छात्र संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि चयन प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं और भ्रष्टाचार हो रहा है, तथा पदों के नाम पर बड़ी रकम की मांग की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों पर अभी विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष आना बाकी है। इसके अलावा, छात्रों ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुलगुरु के चेंबर में तो कई सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन हजारों विद्यार्थियों की आवाजाही वाले मुख्य परिसरों में पर्याप्त कैमरे न होने के कारण सुरक्षा कमजोर बनी हुई है। प्रशासन ने इन दो दिनों के भीतर संतोषजनक कदम नहीं उठाए तो छात्र आंदोलन को और व्यापक रूप देंगे।
ये भी पढ़े: रायपुर नगर निगम पहुंचे गौठान संचालक: 27 रुपए प्रतिदिन भुगतान और 30 लाख बकाए पर हंगामा

