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Report by: Yogendra Singh

Kalayat : हरियाणा के कलायत उपमंडल स्थित बालू गांव के खेतों में गुरुवार को कुदरत और सिस्टम की मार एक साथ देखने को मिली। जब खेतों में खड़ी सोने जैसी गेहूं की तैयार फसल अचानक आग की लपटों में घिर गई। इस भीषण अग्निकांड ने न केवल किसानों की साल भर की मेहनत को खाक कर दिया, बल्कि प्रशासन की मुस्तैदी के दावों की भी पोल खोल दी।

Kalayat चिलचिलाती धूप और तेज हवाओं ने बढ़ाई आग की तपिश

बालू गांव के खेतों में आग लगने की घटना उस समय हुई जब किसान फसल की कटाई और उसे समेटने की तैयारी में जुटे थे। अचानक उठी चिंगारी ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया। चिलचिलाती धूप और तेज हवाओं ने आग में घी का काम किया, जिससे लपटें एक खेत से दूसरे खेत में तेजी से फैलने लगीं। आसमान में धुएं का काला गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था, जिसे देख गांव में हड़कंप मच गया।

Kalayat ग्रामीणों ने ट्रैक्टरों से लड़ी जंग, लेकिन बेअसर रही कोशिशें

खेतों से धुआं उठता देख गांव के सैकड़ों युवा और किसान अपनी जान जोखिम में डालकर मौके पर पहुंचे। आग को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ग्रामीणों ने अपने ट्रैक्टरों की मदद से प्रभावित फसल के चारों ओर जुताई शुरू कर दी ताकि ‘फायर लाइन’ बनाई जा सके। लोगों ने बाल्टियों से पानी और रेत डालकर भी आग बुझाने का भरसक प्रयास किया, लेकिन हवा की रफ्तार के आगे ग्रामीणों के पारंपरिक तरीके नाकाफी साबित हुए और देखते ही देखते कई एकड़ फसल जलकर काली पड़ गई।

Kalayat दमकल विभाग पर फूटा गुस्सा: घंटों देरी से पहुंची गाड़ी

इस पूरी त्रासदी में सबसे दुखद पहलू दमकल विभाग की कार्यप्रणाली रही। प्रभावित किसानों का सीधा आरोप है कि आग लगते ही तुरंत दमकल केंद्र को सूचना दी गई थी, लेकिन दमकल की गाड़ी घंटों की देरी से पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सरकारी मदद पहुंची, तब तक सब कुछ बर्बाद हो चुका था। किसानों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अगर फायर ब्रिगेड की गाड़ी समय पर आती, तो उनके परिवारों का साल भर का दाना-पानी सुरक्षित रह सकता था।

Kalayat मुआवजे की मांग और आंदोलन की चेतावनी

फिलहाल आग लगने के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है, हालांकि अंदेशा जताया जा रहा है कि बिजली के तारों से निकली चिंगारी या शॉर्ट सर्किट इसकी वजह हो सकती है। इस अग्निकांड से पीड़ित किसानों की कमर टूट गई है। गांव के सरपंच और किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत गिरदावरी (नुकसान का आकलन) करवाकर प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आर्थिक सहायता नहीं मिली और दमकल सेवाओं में सुधार नहीं किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

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