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Report by: Ravindra Singh

Amarkantak : मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार छात्राओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की है। छात्रावास (Hostel) में परोसे जा रहे बेहद घटिया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भोजन ने छात्राओं के सब्र का बांध तोड़ दिया, जिसके बाद सैकड़ों छात्राओं ने रात भर कैंपस में धरना दिया।

Amarkantak थाली में कीड़े देख आक्रोशित हुईं छात्राएं

छात्रावास में रहने वाली छात्राओं का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से ऐसा भोजन दिया जा रहा है जो जानवरों के खाने लायक भी नहीं है। ताजा विरोध तब शुरू हुआ जब खाने की थाली में कीड़े रेंगते हुए पाए गए। छात्राओं ने बताया कि मेस में मिलने वाली दाल पानी की तरह पतली होती है और चावल अक्सर कच्चा ही परोस दिया जाता है। चिलचिलाती गर्मी के इस मौसम में ऐसा दूषित खाना खाने से छात्राओं के बीमार होने का खतरा लगातार बना हुआ है।

Amarkantak “अधिकार मांगते, भीख नहीं”: नारों से गूंजा विश्वविद्यालय

देर रात शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन काफी उग्र रहा। अपनी मांगों को लेकर सैकड़ों छात्राएं हॉस्टल से बाहर निकल आईं और विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठ गईं। परिसर “खाने में कीड़ा नहीं चलेगा” और “हम अपना अधिकार मांगते, किसी से भीख नहीं मांगते” जैसे नारों से गूंज उठा। छात्राओं का कहना है कि वे भारी-भरकम हॉस्टल फीस का भुगतान करती हैं, लेकिन बदले में उन्हें न्यूनतम बुनियादी सुविधाएं और स्वच्छ भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है।

Amarkantak मेस प्रबंधन और प्रशासन की लापरवाही पर सवाल

छात्राओं ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने भोजन की गुणवत्ता को लेकर कई बार मेस प्रबंधन और संबंधित वार्डन से शिकायत की थी। हालांकि, प्रशासन ने इन शिकायतों को हर बार अनसुना कर दिया। एक प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालय (Central University) में छात्राओं के स्वास्थ्य के प्रति इस तरह की संवेदनहीनता ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

Amarkantak ठोस सुधार तक विरोध जारी रखने की चेतावनी

रात भर चले इस प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय के सुरक्षा कर्मी और अधिकारी छात्राओं को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन छात्राएं ठोस कार्रवाई और लिखित आश्वासन पर अड़ी रहीं। छात्राओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक मेस प्रबंधन को बदला नहीं जाता और गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित नहीं होता, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं। अब देखना यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्राओं की इन बुनियादी मांगों पर क्या कड़ा कदम उठाता है।

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