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रिपोर्टर: संदीप राजावत

Gwalior : जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को सुधारने की दिशा में ग्वालियर में एक सराहनीय पहल देखने को मिली। ‘कैच द रेन 2026’ अभियान के तहत नगर निगम ग्वालियर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (NIUA), नई दिल्ली के साझा प्रयासों से एक विशेष ‘जन संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। AMRUT 2.0 की शैलो एक्विफर मैनेजमेंट (SAM) परियोजना के अंतर्गत पुनर्जीवित की गई सेनापति हनुमान मंदिर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी परिसर में हुए इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

Gwalior बारिश के पानी को सहेजने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी: अपर आयुक्त

अपर आयुक्त टी. प्रतीक राव (IAS) की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और ग्राउंडवाटर रीचार्ज की आधुनिक तकनीकों पर विस्तार से बात की। अधिकारियों ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे अपने-अपने घरों, दुकानों और व्यावसायिक परिसरों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अवश्य लगवाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी का संकट न खड़ा हो।

NIUA की टीम ने साझा किए अनुभव, सामुदायिक सहभागिता पर दिया जोर

कार्यक्रम में दिल्ली से आई NIUA की विशेष टीम ने भी शिरकत की। टीम के प्रतिनिधियों ने शैलो एक्विफर मैनेजमेंट के सफल मॉडल्स और अनुभवों को उपस्थित लोगों के साथ साझा किया। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि जब तक समाज का हर तबका जल संचयन से नहीं जुड़ेगा, तब तक शहरी जल संकट की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।

‘वाटर वूमेन’ सावित्री श्रीवास्तव की अपील, नागरिकों ने लिया जल रक्षा का संकल्प

ग्वालियर की स्वच्छता ब्रांड एंबेसडर और ‘वाटर वूमेन’ के नाम से मशहूर सावित्री श्रीवास्तव ने कहा कि जल संरक्षण को एक सरकारी योजना मानने के बजाय जन-आंदोलन बनाना होगा। कार्यक्रम के दौरान वार्ड-15 के पार्षद देवेंद्र राठौर, कार्यपालन यंत्री शिशिर श्रीवास्तव समेत कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। उपस्थित सभी लोगों ने मिलकर ग्वालियर में पानी की एक-एक बूंद बचाने और जल स्रोतों को संरक्षित करने की शपथ ली।

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