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मतदान केंद्र पर विवाद से शुरू हुआ मामला

By: Ishu Kumar

Bokaro : जिले के चास थाना क्षेत्र में 23 फरवरी को मतदान के दौरान हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। वार्ड संख्या 32 के एक मतदान केंद्र पर कथित तौर पर गलत तरीके से मतदान कराए जाने का आरोप लगाते हुए पूर्व पार्षद रमाशंकर सिंह ने आपत्ति जताई थी। बताया जा रहा है कि इसी दौरान उनकी पुलिस अधिकारियों से तीखी बहस हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। इस घटनाक्रम में चास के एसडीपीओ प्रवीण कुमार सिंह के घायल होने की भी बात सामने आई है। इसके बाद पुलिस ने रमाशंकर सिंह को हिरासत में ले लिया।

हिरासत में मारपीट का आरोप, वीडियो से बढ़ा विवाद

Bokaro हिरासत में लिए जाने के बाद पूर्व पार्षद के साथ कथित रूप से मारपीट किए जाने का आरोप लगाया गया है। परिजनों और समर्थकों का कहना है कि पुलिस ने उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया। जब उन्हें न्यायालय में पेश किया गया तो वे बिना सहारे के चलने में असमर्थ दिखाई दिए। इस दौरान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और गरमा गया है।

बताया जा रहा है कि थाने में उनसे मिलने पहुंचे सरदार कॉलोनी निवासी सोनू कुमार के साथ भी पुलिस ने कथित तौर पर मारपीट की। सोनू का आरोप है कि उन्हें बिना किसी कारण दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया, जिससे उनके शरीर पर चोट के कई निशान हैं।

जनप्रतिनिधियों ने की निष्पक्ष जांच की मांग

Bokaro घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। बोकारो की कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह ने इस मामले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी ने कानून का उल्लंघन किया है तो विधि सम्मत कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी जनसेवक के साथ इस प्रकार की बर्बरता स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं पार्षद प्रत्याशी रेखा देवी ने कहा कि न्यायालय में अपने पति की हालत देखकर वे स्तब्ध रह गईं। उनके अनुसार, वे खुद से चल भी नहीं पा रहे थे और सहारा देकर उन्हें जेल ले जाया गया। उन्होंने दावा किया कि विरोध केवल मतदान में कथित गड़बड़ी को लेकर था, लेकिन पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की।

फिलहाल इस मामले को लेकर शहर में चर्चा तेज है। एक ओर पुलिस पर कठोर कार्रवाई के आरोप हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन अपनी प्रक्रिया को कानून के दायरे में बता रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद सच्चाई क्या सामने आती है।

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