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Report by: Sanjeev Kumar

Bokaro : “मेरा बेटा कहाँ है?” यह सवाल पिछले आठ महीनों से सेक्टर 6 निवासी रिटायर्ड पिता लक्ष्मी सिंह और उनका पूरा परिवार पुलिस से पूछ रहा है। 27 अगस्त 2025 की सुबह घर से निकले लैब टेक्नीशियन संतोष कुमार आज तक घर नहीं लौटे। बोकारो पुलिस की सुस्त जांच और कार्यशैली से तंग आकर अब परिजनों ने संतोष की सूचना देने वाले को 2 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

Bokaro 27 अगस्त की सुबह और आखिरी सीसीटीवी फुटेज

संतोष कुमार 27 अगस्त 2025 की सुबह करीब 6:00 बजे यह कहकर घर से निकले थे कि वे थोड़ा काम निपटाकर जल्द लौटेंगे और फिर ड्यूटी पर जाएंगे। लेकिन जब वे दोपहर तक नहीं लौटे और मोबाइल बंद आने लगा, तो परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने जब खुद स्तर पर तलाश शुरू की, तो सेक्टर 11 स्थित एक पेट्रोल पंप के सीसीटीवी फुटेज में संतोष एक महिला (उर्मिला) के साथ बाइक पर जाते दिखे। बाद में वह बाइक सेक्टर 11 के ही एक ब्लॉक में खड़ी मिली, लेकिन संतोष का कोई पता नहीं चला।

Bokaro पुलिस की कार्यशैली पर सवाल: परिजनों से ही वसूला गाड़ी का किराया!

परिजनों ने सेक्टर 6 थाना पुलिस पर बेहद चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि जिस संदिग्ध महिला ‘उर्मिला’ के साथ संतोष को आखिरी बार देखा गया था, उसे पकड़ने के लिए पुलिस ने परिजनों से ही किराये की गाड़ी मंगवाई और उसका खर्च भी उन्हीं से भरवाया। पुलिस का तर्क था कि “सरकारी पचड़े” में समय लगेगा, इसलिए निजी वाहन का इंतजाम करें। आरोप है कि पुलिस ने उस महिला से ठीक से पूछताछ करने के बजाय उसे छोड़ दिया और बाद में वह किसी अन्य मामले में जेल चली गई।

Bokaro धमकी और आर्थिक तंगी के बीच पिसता परिवार

संतोष के लापता होने से परिवार की कमर टूट गई है। घर का खर्च पिता की महज 3,000 रुपये मासिक पेंशन पर टिका है। संतोष की बेटी, जो देहरादून में पढ़ाई कर रही है, उसकी शिक्षा पर भी अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

परिजनों का आरोप: “पुलिस हमें ही धमका रही है। थाना प्रभारी कहते हैं कि संतोष को गायब करने में हमारा ही हाथ है। यहाँ तक कि संतोष की पत्नी का नार्को टेस्ट कराने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।”

Bokaro राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद भी नतीजा शून्य

इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ भी ले लिया है। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर पुलिस के आला अधिकारियों से बात की थी, लेकिन धरातल पर कोई प्रगति नहीं हुई। अब परिजनों को केवल हाई कोर्ट से उम्मीद बची है। उन्हें डर है कि कहीं ‘पुष्पा कुमारी’ केस की तरह ही इस मामले में भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही पुलिस नींद से जागेगी।

Bokaro नए कप्तान से जगी उम्मीद की किरण

बोकारो के नए पुलिस कप्तान नाथू सिंह मीणा के पदभार संभालने के बाद अब सबकी निगाहें उन पर टिकी हैं। क्या वे अपनी टीम को सक्रिय कर इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझा पाएंगे? क्या उर्मिला और संतोष के बीच के संबंधों और उस आखिरी दिन की कड़ियों को जोड़ा जाएगा? यह सवाल बोकारो की जनता और एक बिलखता परिवार पूछ रहा है।

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