रिपोर्टर: गजेन्द्र सिंह राजावत
Ayodhya : उत्तर प्रदेश की पावन रामनगरी अयोध्या में आयोजित होने जा रहा ‘दीपोत्सव-2026’ इस बार न सिर्फ दीपों की आलौकिक रोशनी से जगमगाएगा, बल्कि भारतीय लोक संस्कृति और समृद्ध परंपराओं के एक अद्भुत महासंगम का गवाह भी बनेगा। इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों से आ रहे सैकड़ों लोक कलाकार अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों से रामनगरी की रौनक में चार चांद लगाएंगे। मयूर नृत्य से लेकर छऊ और घूमर से लेकर झिझिया तक, अयोध्या की सड़कें और सांस्कृतिक मंच देश की विविधता और सांस्कृतिक एकता का अनूठा संदेश देंगे।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों से उमड़ेगी लोक नृत्यों की बयार
Ayodhya प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, दीपोत्सव के अवसर पर उत्तर प्रदेश के कोने-कोने से आए कला दल अपनी माटी की खुशबू बिखेरेंगे। इसमें मथुरा का प्रसिद्ध मयूर और बम रसिया नृत्य, प्रयागराज का ढेढ़िया नृत्य, बुंदेलखंड (बांदा) का पाई डंडा तथा सोनभद्र का करमा और मांदल-सिंघा नृत्य आकर्षण का केंद्र रहेंगे। इसके साथ ही मेजबान अयोध्या के स्थानीय कलाकार बधावा, फरुवाही और शंख-डमरू वादन से माहौल को भक्तिमय बनाएंगे। गाजीपुर का धोबिया, गोरखपुर का वनटांगिया, पीलीभीत का थारू, झांसी की राई, सुलतानपुर का नटवरी और बहराइच का डोमकच नृत्य भी दर्शकों को अपनी समृद्ध परंपराओं से मंत्रमुग्ध करेगा।
पूर्व से दक्षिण और पश्चिम तक: देश भर की लोक कलाओं का अद्भुत संगम
Ayodhya दीपोत्सव-2026 की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें उत्तर प्रदेश के अलावा देश के अन्य प्रमुख राज्यों की पारंपरिक लोक विधाओं को भी विशेष स्थान दिया गया है। पश्चिम बंगाल के कलाकार अपने पारंपरिक ‘श्री खोल’ वादन की छाप छोड़ेंगे, वहीं ओडिशा से आए दल मास्क डांस, रणप्पा चढैय्या, शाही जात्रा और शंख वादन पेश करेंगे। इसके अलावा झारखंड का विश्व प्रसिद्ध पुरुलिया छऊ, मध्य प्रदेश का गुदुम बाजा, कर्नाटक का ढोलु कुनीथा, गुजरात का रोमांचक तलवार रास, राजस्थान का घूमर-चरी, बिहार का झिझिया, तमिलनाडु (चेन्नई) का कावड़ी व कड़गम तथा आंध्र प्रदेश का बोनालू नृत्य दीपोत्सव के मंच की शोभा बढ़ाएंगे।
भव्य शोभायात्रा बनेगी आकर्षण का केंद्र, नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ने की पहल
Ayodhya दीपोत्सव की भव्य शोभायात्रा में भी लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। प्रयागराज का ढेढ़िया, मथुरा का मयूर, बांदा का पाई डंडा और आजमगढ़ का धोबिया नृत्य शोभायात्रा को जीवंत और आकर्षक रूप देंगे। संस्कृति विभाग के अनुसार, इस आयोजन का मुख्य ध्येय केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि हमारी विलुप्त होती पारंपरिक कलाओं को एक बड़ा मंच प्रदान करना और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है। अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि दीपोत्सव-2026 दीपों की जगमगाहट और लोकसंगीत की सुमधुर तानों के साथ पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति, सद्भाव और अखंडता का एक सशक्त संदेश प्रसारित करेगा।

