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रिपोर्टर: रतन तिवारी

Anuppur : जिले की ग्राम पंचायत वेंकटनगर में केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन को लेकर स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत जारी किए गए पट्टों में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। कई पट्टों में शासकीय स्कूल, सार्वजनिक तालाब, खेल मैदान, गौठान और खलिहान जैसी आम निस्तार की आरक्षित जमीनों के हिस्सों को भी शामिल कर दिया गया है।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी पट्टों का भौतिक सत्यापन और राजस्व रिकॉर्ड की सूक्ष्म जांच नहीं हो जाती, तब तक संबंधित जमीनों की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी तरह स्थगित रखी जाए।

85 एकड़ आरक्षित भूमि और फर्जीवाड़े के आरोप

Anuppur ग्रामीणों के अनुसार, वेंकटनगर में कुल 85 एकड़ भूमि आबादी क्षेत्र के रूप में दर्ज थी, जिसमें मकानों के साथ-साथ डिस्पेंसरी, स्कूल, तालाब और गौठान जैसी सार्वजनिक सुविधाएं शामिल थीं। आरोप है कि कुछ लोगों ने इन सार्वजनिक भूखंडों पर अवैध कब्जे कर निर्माण कर लिए और बाद में नियमों को ताक पर रखकर इनके पट्टे अपने नाम जारी करवा लिए।

इसके अलावा, पट्टा वितरण में कई अन्य बड़ी अनियमितताएं भी सामने आई हैं:

  • एकल नाम दर्ज होना: नियमानुसार जिस आबादी भूमि पर वर्षों से परिवार रह रहे थे, वहां सभी वैध उत्तराधिकारियों को सह-खातेदार बनाया जाना था, लेकिन कई जगह केवल एक व्यक्ति के नाम पर ही पूरा पट्टा जारी कर दिया गया।
  • एक परिवार को multiple पट्टे: कई मामलों में पति-पत्नी दोनों के नाम अलग-अलग पट्टे बने हैं, तो कुछ लोगों को दो से तीन अलग-अलग स्थानों पर पट्टे आवंटित किए गए हैं।
  • गैर-निवासियों को आवंटन: जो लोग बरसों पहले गांव छोड़ चुके हैं या वहां नहीं रहते, उनके नाम पर भी दस्तावेज तैयार कर दिए गए हैं।
  • आदिवासी भूमि का नामांतरण: आरोप है कि जिन मकानों में पूर्व में आदिवासी परिवार निवास करते थे, उनके पट्टे अनारक्षित वर्ग के व्यक्तियों के नाम कर दिए गए।

कोर्ट के आदेशों और 2016 के निर्देशों की अनदेखी

Anuppur स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि जो मामले वर्तमान में जिला एवं सत्र न्यायालय या उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, उनमें भी अदालती स्थगनादेशों को नजरअंदाज कर पट्टे जारी कर दिए गए।

साथ ही, ग्रामीणों ने साल 2016 के मध्य प्रदेश शासन के एक आदेश (क्र. 564/अ-74/2015-16) का हवाला देते हुए बताया कि वार्ड क्रमांक 3, 6, 7, 8 और 9 के कई परिवारों को यह कहकर पट्टा देने से मना कर दिया गया था कि वह जमीन तालाब मद की है। अब सवाल यह उठ रहा है कि उन्हीं विवादित भूखंडों पर हाल में किस नियम के तहत पट्टे जारी कर दिए गए, जबकि वार्ड 9 के कई पात्र ग्रामीण आज भी पट्टे से वंचित हैं।

जांच पूरी होने तक रजिस्ट्री रोकने की मांग

Anuppur ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्वामित्व योजना के तहत जारी सभी भू-अधिकार पत्रों की स्थलीय जांच (On-site verification) कराई जाए। विशेष रूप से तालाब, गौठान, स्कूल और खलिहान की जमीनों का सीमांकन कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक किसी भी पट्टे की रजिस्ट्री न की जाए ताकि भविष्य में होने वाले कानूनी विवादों और सरकारी संपत्ति के नुकसान से बचा जा सके।

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