Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:हिंदी दिवस के मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में हिंदी, भारतीय भाषाओं और ‘वंदे मातरम्’ के महत्व पर अपने विचार रखे। नवी मुंबई में हुए हिंदी दिवस 2026 और छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिंदी देश को भाषाई रूप से जोड़ने और राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
अमित शाह ने भारतीय भाषाओं और मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे के लिए अपनी मातृभाषा के माध्यम से देश की संस्कृति, परंपरा और भावनाओं को समझना अधिक स्वाभाविक होता है।
‘वंदे मातरम्’ को बताया राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक
Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:गृह मंत्री ने अपने संबोधन में ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में भारतीयों के भीतर राष्ट्रीय चेतना जगाने वाली रचना थी।
उन्होंने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ ने अंग्रेजी शासन के दौर में लोगों के भीतर आजादी की भावना को मजबूत करने में भूमिका निभाई। शाह ने इसे भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से भी जोड़कर देखा।
मातृभाषा के जरिए देश को समझने पर जोर
Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:अमित शाह ने कहा कि बच्चे के शुरुआती विकास में मातृभाषा की अहम भूमिका होती है। उनके अनुसार, परिवार, समाज, संस्कृति और परंपराओं से जुड़ाव को समझने में अपनी भाषा महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।
उन्होंने भारतीय भाषाओं को लेकर मतभेद से बचने और सभी भाषाओं को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि देश की विविध भाषाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
हिंदी को राजभाषा बनाए जाने का किया उल्लेख
Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:गृह मंत्री ने संविधान निर्माताओं द्वारा हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किए जाने का भी उल्लेख किया। उन्होंने राजभाषा विभाग के कामकाज और हिंदी को बढ़ावा देने से जुड़ी विभिन्न पहलों की चर्चा की।
उन्होंने नई शिक्षा नीति का हवाला देते हुए प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया और भारतीय भाषाओं के संरक्षण तथा विस्तार की जरूरत बताई।
भारतीय भाषाओं के बीच विवाद से बचने की अपील
Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:अमित शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा करने के बजाय उन्हें देश की साझा सांस्कृतिक विरासत के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने सभी राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भारतीय भाषाओं के विकास के लिए मिलकर काम करने की बात कही।
उनके अनुसार, देश की भाषाई विविधता उसकी ताकत है और किसी भी भाषा के विकास को दूसरी भाषा के नुकसान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का दिया उदाहरण
Amit Shah on Hindi and Vande Mataram:अपने संबोधन में अमित शाह ने कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने भारतीय संस्कृति और साहित्य की तुलना ऐसे कमल से की, जिसकी अलग-अलग पंखुड़ियां देश की क्षेत्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं।
शाह ने कहा कि भारतीय भाषाओं में से किसी एक को कमजोर करने से देश की सांस्कृतिक विविधता प्रभावित होगी। इसलिए सभी प्रादेशिक भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन पर समान रूप से ध्यान देना जरूरी है।

