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by-Ravindra Sikarwar

भारत और पाकिस्तान के बीच सर क्रीक विवाद एक ऐसा सीमा विवाद है जो दशकों से अनसुलझा बना हुआ है। यह विवाद गुजरात के कच्छ के रण क्षेत्र में स्थित 96 किलोमीटर लंबे इस ज्वारीय नाले को लेकर है, जो भारत के कच्छ जिले और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच फैला हुआ है। सर क्रीक न केवल भूमि सीमा का मुद्दा है, बल्कि समुद्री सीमाओं, आर्थिक क्षेत्रों और रणनीतिक हितों को भी प्रभावित करता है। हाल ही में, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को इस क्षेत्र में आक्रामक रुख अपनाने के खिलाफ चेतावनी दी है, जिससे यह पुराना विवाद फिर से सुर्खियों में आ गया है। यह विवाद न केवल दोनों देशों के बीच तनाव का कारण है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और संसाधनों के बंटवारे पर भी असर डालता है।

सर क्रीक का भौगोलिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य:
सर क्रीक, जिसे स्थानीय भाषा में ‘बन गंगा’ भी कहा जाता है, कच्छ के रण के पश्चिमी छोर पर स्थित एक संकीर्ण जलमार्ग है। यह नाला लगभग 96 किलोमीटर लंबा और कुछ स्थानों पर मात्र 2-3 किलोमीटर चौड़ा है, जो अरब सागर में खुलता है। यह क्षेत्र दलदली भूमि, मैंग्रोव जंगलों और ज्वारीय मैदानों से भरा हुआ है, जहां हर छह घंटे में ज्वार-भाटा के कारण पानी का स्तर बदल जाता है। पर्यावरणीय दृष्टि से यह क्षेत्र पक्षियों, मछलियों और अन्य जलीय जीवों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन विवाद के कारण यहां अवैध मछली पकड़न और घुसपैठ की घटनाएं आम हैं।

विवाद की जड़ें ब्रिटिश काल में हैं। 1908 में बॉम्बे प्रेसीडेंसी सरकार ने सर क्रीक के मुहाने से ऊपरी छोर तक की सीमा निर्धारित की थी, जिसमें नाले के मध्य भाग को सीमा रेखा माना गया था। 1947 के विभाजन के बाद सिंध प्रांत पाकिस्तान का हिस्सा बन गया, जबकि कच्छ रियासत भारत में शामिल हो गई। विभाजन के समय सर क्रीक को लेकर कोई स्पष्ट बंटवारा नहीं हुआ, जिससे विवाद की नींव पड़ गई। 1950 के दशक में दोनों देशों ने इस क्षेत्र पर दावे ठोके, और 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कच्छ के रण में झड़पें हुईं। युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र ट्रिब्यूनल ने रण के 90 प्रतिशत हिस्से को भारत को सौंप दिया, लेकिन सर क्रीक का मामला अनसुलझा रह गया। ट्रिब्यूनल ने सुझाव दिया कि दोनों पक्ष बातचीत से हल निकालें, लेकिन यह सिफारिश अमल में नहीं आई।

दोनों देशों के दावे: भूमि और समुद्र का टकराव
भारत का दावा 1908 के बॉम्बे रेजोल्यूशन पर आधारित है, जिसमें सर क्रीक को एक नौगम्य जलमार्ग माना गया है। भारत के अनुसार, सीमा नाले के बीच से होकर गुजरती है, जिससे नाले का पूर्वी हिस्सा (लगभग आधा) भारत का हिस्सा बनता है। इससे भारत को अरब सागर में 200 समुद्री मील के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) का बड़ा हिस्सा मिलेगा, जहां तेल-गैस भंडार होने की संभावना है।

वहीं, पाकिस्तान का तर्क है कि सर क्रीक एक ज्वारीय नाला (एस्ट्यूरी) है, न कि नौगम्य चैनल, इसलिए सीमा पूर्वी तट पर होनी चाहिए। पाकिस्तान के मुताबिक, नाले का अधिकांश हिस्सा सिंध प्रांत का है, और भारत केवल पूर्वी किनारे तक सीमित है। यदि पाकिस्तान का दावा सही साबित होता है, तो भारत का ईईजेड छोटा हो जाएगा, जबकि पाकिस्तान को कच्छी पट्टी के दक्षिण में बड़ा समुद्री क्षेत्र मिलेगा। यह विवाद न केवल 150 वर्ग किलोमीटर भूमि पर है, बल्कि समुद्री संसाधनों, मछली पालन और नौसैनिक गतिविधियों पर भी केंद्रित है।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व: क्यों है यह विवाद संवेदनशील?
सर क्रीक का स्थान रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पाकिस्तान के प्रमुख बंदरगाह कराची से मात्र 150 किलोमीटर दूर है, और भारत के कच्छ के रण से सटा हुआ है। अनसुलझी सीमा के कारण भारतीय नौसेना को पाकिस्तानी जलक्षेत्र में घुसपैठ का खतरा रहता है, जबकि पाकिस्तान के लिए यह क्षेत्र अवैध घुसपैठ का गढ़ बन सकता है। आर्थिक दृष्टि से, इस क्षेत्र में प्राकृतिक गैस और तेल के संभावित भंडार हैं, जिनकी अनुमानित कीमत अरबों डॉलर है। मछली पालन उद्योग भी प्रभावित होता है, जहां दोनों देशों के मछुआरे अक्सर पकड़े जाते हैं—भारत के 200 से अधिक मछुआरे पाकिस्तान की जेलों में बंद हैं।

पर्यावरणीय रूप से, सर क्रीक मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ बफर का काम करता है। विवाद के कारण संयुक्त संरक्षण प्रयास रुक जाते हैं, जिससे जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है। कुल मिलाकर, यह विवाद दोनों देशों की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार मार्गों और क्षेत्रीय वर्चस्व को प्रभावित करता है।

समाधान के प्रयास: बातचीत की लंबी कतार
दोनों देशों ने सर क्रीक विवाद सुलझाने के लिए कई दौर की बातचीत की है। 1969 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तानी राष्ट्रपति याह्या खान के बीच समझौता हुआ, जिसमें भूमि सीमा पर सहमति बनी लेकिन समुद्री सीमा अनसुलझी रही। 1989, 2001 और 2006-07 में संयुक्त सर्वेक्षण हुए, जहां दोनों पक्षों ने नक्शे और डेटा साझा किए। 2007 में भारत ने पाकिस्तान को नाले के मध्य भाग पर सीमा मानने का प्रस्ताव दिया, लेकिन पाकिस्तान ने अस्वीकार कर दिया।

अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के सुझाव भी आए, लेकिन दोनों देश द्विपक्षीय वार्ता पर जोर देते हैं। संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत समुद्री सीमाओं का निर्धारण संभव है, लेकिन पाकिस्तान ने इस संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। हाल के वर्षों में, आतंकवाद और सीमा तनाव के कारण बातचीत रुकी हुई है।

वर्तमान स्थिति: राजनाथ सिंह की चेतावनी और भविष्य की आशाएं
2 अक्टूबर 2025 को कच्छ के दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत सर क्रीक में पाकिस्तान की किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने 78 वर्षों से चली आ रही इस सीमा समस्या को हल करने के भारत के प्रयासों का जिक्र किया, लेकिन पाकिस्तान के रुख को जिम्मेदार ठहराया। यह चेतावनी हाल की घुसपैठ की घटनाओं और पाकिस्तानी नौसेना की गतिविधियों के संदर्भ में आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सर क्रीक विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली से ही संभव है। यदि हल हो जाता है, तो इससे समुद्री संसाधनों का संयुक्त दोहन, मछुआरों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति सुनिश्चित होगी। हालांकि, वर्तमान भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह आसान नहीं लगता। यह विवाद भारत-पाक संबंधों की जटिलताओं का प्रतीक है, जहां पुरानी सीमाएं नई चुनौतियां पैदा करती रहती हैं।