by-Ravindra Sikarwar
भारतीय उपमहाद्वीप में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के तहत, नेपाल को उसकी पहली महिला प्रधानमंत्री मिली हैं। भारत ने सुशीला कार्की को नेपाल का नया प्रधान मंत्री बनने पर गर्मजोशी से स्वागत किया है और पड़ोसी देश में शांति और स्थिरता के लिए अपना पूरा समर्थन देने का संकल्प लिया है।
ऐतिहासिक नियुक्ति और भारत का रुख सुशीला कार्की, जो कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं, को नेपाल के युवा-नेतृत्व वाले “जेन-जेड” विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है। ये विरोध प्रदर्शन पूर्ववर्ती सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुशासन के खिलाफ थे। उनकी नियुक्ति को एक ऐसे कदम के रूप में देखा जा रहा है जो नेपाल को एक नई राजनीतिक दिशा दे सकता है, क्योंकि उन्हें पक्षपात से परे और न्यायिक ईमानदारी के लिए जाना जाता है।
भारत ने इस ऐतिहासिक क्षण का स्वागत करते हुए, नेपाल के साथ अपने गहरे संबंधों को रेखांकित किया है। भारत का मानना है कि यह नियुक्ति नेपाल को राजनीतिक स्थिरता की ओर ले जाएगी, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। भारत सरकार ने यह भी दोहराया है कि वह नेपाल के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए हर संभव सहयोग करेगी।
एक परिचय: 73 वर्षीय सुशीला कार्की ने जुलाई 2016 में नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनकर इतिहास रचा था। उनका करियर न्यायिक निष्पक्षता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख के लिए जाना जाता है। उन्होंने भारत के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान में अपनी मास्टर डिग्री प्राप्त की थी, जिससे उनका भारत के साथ एक विशेष संबंध है। उनकी नियुक्ति से यह उम्मीद है कि नेपाल में लोकतंत्र और सुशासन की बहाली होगी और जल्द ही चुनाव भी कराए जाएंगे।
