by-Ravindra Sikarwar
जिनेवा: भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में स्विट्जरलैंड द्वारा भारत में अल्पसंख्यकों पर की गई “भ्रामक” टिप्पणियों पर कड़ी आपत्ति जताई है, और साथ ही स्विट्जरलैंड को नस्लवाद और ज़ेनोफोबिया से संबंधित उसकी अपनी घरेलू चुनौतियों से निपटने में मदद की पेशकश की है।
भारत का UNHRC में बयान:
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में भारत के प्रतिनिधि ने स्विट्जरलैंड पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत में अल्पसंख्यक मुद्दों पर उसकी टिप्पणी “भ्रामक और निराधार” है। भारत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि स्विट्जरलैंड को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के बजाय, अपने देश के भीतर मौजूद नस्लवाद और विदेशियों के प्रति घृणा (ज़ेनोफोबिया) जैसी गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भारत ने इस राजनयिक मंच का उपयोग करते हुए स्विट्जरलैंड को यह भी प्रस्ताव दिया कि वह इन चुनौतियों का समाधान करने में उसकी सहायता कर सकता है। भारत का यह कदम एक मजबूत राजनयिक संदेश था, जिसमें उसने किसी भी बाहरी देश द्वारा अपने आंतरिक मामलों के गलत चित्रण का विरोध किया। यह अपनी तरह का एक अनोखा कदम है, जहाँ एक देश ने दूसरे देश की आलोचना को खारिज करते हुए उसे अपनी ही समस्याओं को हल करने की सलाह दी।
राजनयिक दृष्टिकोण और निहितार्थ:
यह घटना भारत की एक नई और मुखर विदेश नीति को दर्शाती है, जहाँ वह अपनी संप्रभुता और आंतरिक मामलों की सुरक्षा के लिए आक्रामक रुख अपनाता है। पहले, ऐसे मौकों पर भारत केवल अपना बचाव करता था, लेकिन अब उसने जवाबी हमला करना शुरू कर दिया है। यह दिखाता है कि भारत अब किसी भी देश को अपने आंतरिक मुद्दों पर उपदेश देने का मौका नहीं देना चाहता। स्विट्जरलैंड को उसकी अपनी कमियों पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देकर, भारत ने प्रभावी रूप से उसकी आलोचना की धार को कुंद कर दिया। यह राजनयिक द्वंद्व भारत की वैश्विक मंच पर बढ़ती मुखरता और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
