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by-Ravindra Sikarwar

भारत में ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत निकाली जा रही तिरंगा यात्राएं इस समय पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हर शहर, हर गांव, और हर मोहल्ले में लोग बड़े उत्साह और देशभक्ति की भावना के साथ इन यात्राओं में शामिल हो रहे हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारतीय नागरिकों के दिलों में देश प्रेम की भावना को जगाना और स्वतंत्रता संग्राम के गुमनाम नायकों को सम्मान देना है।

तिरंगा यात्रा: एक नई उमंग और एकता का प्रतीक:
यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इन यात्राओं में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग और समुदाय के लोग हिस्सा ले रहे हैं। तिरंगे झंडों, देशभक्ति के नारों और गीतों से सड़कें गूंज रही हैं। लोग अपनी छतों और घरों पर भी शान से तिरंगा फहरा रहे हैं। यह नजारा देश की एकता और विविधता को एक साथ प्रदर्शित करता है, जहां हर कोई एक राष्ट्र के रूप में एक साथ खड़ा है।

यात्रा का उद्देश्य और महत्व:

  • देशभक्ति की भावना को मजबूत करना: तिरंगा यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य नागरिकों, खासकर युवाओं में राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना को जगाना है।
  • स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि: यह यात्रा उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
  • आत्मनिर्भर भारत का संदेश: यात्रा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संदेश को भी जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
  • सामाजिक एकजुटता: यह यात्रा विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाकर सामाजिक सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करती है।

कई राज्यों में, इन यात्राओं के दौरान विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लोक नृत्य, नाटक और संगीत के माध्यम से देश के इतिहास और संस्कृति को दर्शाया जा रहा है। कुल मिलाकर, ‘तिरंगा यात्रा’ भारत को एक सूत्र में पिरोने और आजादी के 75 वर्षों का जश्न मनाने का एक शक्तिशाली माध्यम बन गई है।

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