by-Ravindra Sikarwar
सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने आवारा कुत्तों को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है, जिसके चलते ऑनलाइन और सोशल मीडिया पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद की जड़:
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली से आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि नागरिकों को सड़कों पर होने वाली असुविधा से बचाया जा सके। यह आदेश कई याचिकाओं के जवाब में आया है, जिसमें कुत्तों के काटने, सड़कों पर उनके झुंड और रात में होने वाले शोर से जुड़ी शिकायतें थीं।
हालाँकि, इस आदेश को लेकर पशु प्रेमियों और नागरिकों के बीच एक गरमागरम बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं, उनका कहना है कि इससे सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। वहीं, दूसरी तरफ, पशु अधिकार कार्यकर्ता इस फैसले की आलोचना कर रहे हैं। उनका मानना है कि यह क्रूर और अमानवीय है।
ऑनलाइन बहस और दोनों पक्षों के तर्क:
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तरह-तरह के पोस्ट और मीम वायरल हो रहे हैं।
- नागरिकों का पक्ष: बहुत से लोग इस फैसले के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि आवारा कुत्तों से बच्चों और बुजुर्गों को खतरा रहता है। रात में कुत्तों का भौंकना भी एक बड़ी समस्या है, जिससे नींद खराब होती है। वे चाहते हैं कि सरकार और नगर निगम इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें।
- पशु प्रेमियों का पक्ष: पशु प्रेमी इस फैसले से नाराज हैं। उनका तर्क है कि कुत्तों को हटाना इसका समाधान नहीं है, बल्कि यह एक अस्थायी उपाय है। उनका मानना है कि नसबंदी और टीकाकरण (Sterilisation and Vaccination) ही इस समस्या का स्थायी समाधान है। उनका कहना है कि सभी जानवरों को जीने का अधिकार है और उन्हें सड़कों से हटाना उनकी आजादी का हनन है। कुछ लोगों ने इस फैसले को नैतिक रूप से गलत भी बताया है।
आगे की राह क्या?
यह बहस केवल एक आदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मनुष्य और जानवर के बीच सह-अस्तित्व के एक बड़े सवाल को उठाती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और नगर निगम इस आदेश को कैसे लागू करते हैं और क्या वे एक ऐसा समाधान ढूंढ पाते हैं जो सभी पक्षों को स्वीकार्य हो।
