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रायपुर: छत्तीसगढ़ में अब अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान और धरपकड़ के लिए पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सख्त निर्देशों के बाद पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

मुख्यमंत्री के आदेश पर पुलिस मुख्यालय का सख्त रुख:
राज्य में अवैध अप्रवासियों की संभावित मौजूदगी को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनके आदेश पर तत्काल कार्रवाई करते हुए पुलिस मुख्यालय ने सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को पत्र लिखकर इस मामले में सक्रियता दिखाने और गहन जांच करने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए अवैध रूप से रह रहे ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाए।

सभी जिलों में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन:
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में एक विशेष कार्य बल (स्पेशल टास्क फोर्स – एसटीएफ) का गठन किया जाएगा। यह एसटीएफ विशेष रूप से संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान करने और उनके बारे में जानकारी जुटाने के लिए काम करेगी। एसटीएफ में स्थानीय पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ खुफिया एजेंसियों के कर्मियों को भी शामिल किया जा सकता है, ताकि सूचनाओं का प्रभावी ढंग से संग्रह और विश्लेषण किया जा सके।

जांच के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश:
पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस अधीक्षकों को जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। इन निर्देशों में निम्नलिखित प्रमुख बातें शामिल हैं:

  • खुफिया तंत्र को सक्रिय करना: सभी जिलों के खुफिया तंत्र को सक्रिय कर ऐसे व्यक्तियों और उनके मददगारों के बारे में जानकारी एकत्र की जाए।
  • सीमावर्ती क्षेत्रों पर विशेष নজর: राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों और उन इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाए, जहां अवैध अप्रवासियों के प्रवेश या छिपने की संभावना अधिक है।
  • किराएदारों का सत्यापन: मकान मालिकों को अपने किराएदारों का पहचान सत्यापन अनिवार्य रूप से कराने के लिए जागरूक किया जाए और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
  • पुराने रिकॉर्ड की छानबीन: पिछले कुछ वर्षों में दर्ज हुए संदिग्ध मामलों और गिरफ्तारियों के रिकॉर्ड की दोबारा छानबीन की जाए, ताकि किसी भी संभावित नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
  • अन्य राज्यों से समन्वय: यदि आवश्यक हो तो पड़ोसी राज्यों की पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित कर सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाए।
  • जन जागरूकता अभियान: आम लोगों को भी अवैध अप्रवासियों के बारे में जानकारी देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और इसके लिए जागरूकता अभियान चलाया जाए।

राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकी संतुलन पर जोर:
राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन इस कार्रवाई को राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकी संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक मान रहे हैं। अवैध अप्रवासियों की उपस्थिति न केवल कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती है, बल्कि स्थानीय संसाधनों और अवसरों पर भी दबाव डाल सकती है। इसलिए, सरकार इस मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।

मुख्यमंत्री के इस कड़े रुख और पुलिस मुख्यालय के सक्रिय प्रयासों से यह उम्मीद की जा रही है कि छत्तीसगढ़ में अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या मुसलमानों की पहचान और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। यह कदम राज्य की सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।