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नई दिल्ली: भारत सरकार ने वर्तमान रक्षा हालातों के मद्देनजर एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए थल सेनाध्यक्ष को टेरिटोरियल आर्मी (प्रादेशिक सेना) को बुलाने की विशेष शक्तियां प्रदान की हैं। यह कदम भारतीय सेना की परिचालन क्षमताओं को बढ़ाने और राष्ट्र की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, थल सेनाध्यक्ष को प्रादेशिक सेना के सभी अधिकारियों और सैनिकों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करने, नियमित सेना को सहायता प्रदान करने या उसकी पूरक शक्ति के रूप में तैनात करने का अधिकार दिया गया है। यह अधिकार प्रादेशिक सेना नियम 1948 के नियम 33 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए दिया गया है।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तीनों सेना प्रमुखों और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की है। इस बैठक में पश्चिमी सीमा पर सुरक्षा स्थिति और भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की गई।

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह उपस्थित थे।

इस बैठक में, रक्षा मंत्री ने पश्चिमी सीमा पर मौजूदा सुरक्षा स्थिति का जायजा लिया और तीनों सेनाओं की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने सेना प्रमुखों को किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।

थल सेनाध्यक्ष को प्रादेशिक सेना को बुलाने की विशेष शक्तियां प्रदान करने का निर्णय, भारतीय सेना की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं को बढ़ाने और किसी भी आपात स्थिति में तेजी से तैनाती सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। प्रादेशिक सेना, जिसमें स्वयंसेवी सैनिक होते हैं, नियमित सेना की सहायता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, खासकर आपातकालीन स्थितियों में।

यह निर्णय सरकार की उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है जिसका उद्देश्य देश की रक्षा तैयारियों को मजबूत करना और किसी भी बाहरी खतरे से निपटने के लिए सेना को पूरी तरह से सक्षम बनाना है। यह निर्णय स्पष्ट रूप से दिखाता है कि भारत सरकार अपनी सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है।