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रिपोर्टर: रविन्‍द्र सिंह

Gaya : कौशलों और इरादों में दम हो, तो परिस्थितियां खुद-ब-खुद घुटने टेक देती हैं। इस कहावत को बिहार के गया जिले की एक होनहार बेटी ने सच कर दिखाया है। जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत जयपुर पंचायत के हेमदपुर गांव की रहने वाली 19 वर्षीय स्वीटी कुमारी आज पूरे इलाके के लिए मिसाल बन चुकी हैं। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली स्वीटी के घर पर आज नौकरियों की लाइन लग गई है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और अटूट लगन के दम पर एक या दो नहीं, बल्कि पूरे चार सरकारी विभागों की परीक्षाओं में सफलता का परचम लहराया है।

Gaya तपती धूप और कड़ाके की ठंड में 10 किमी साइकिल चलाकर सीढ़ी चढ़ी

स्वीटी की यह स्वर्णिम सफलता इतनी आसान नहीं थी; इसके पीछे सालों का कड़ा संघर्ष और पसीना छुपा है। एक साधारण किसान सुरेश कुमार की पुत्री होने के कारण स्वीटी के सामने आर्थिक तंगी और संसाधनों का घोर अभाव था। गांव में पढ़ाई की उचित व्यवस्था न होने के कारण वह हर रोज बिना नागा किए लगभग 10 किलोमीटर साइकिल चलाकर पढ़ने जाती थीं। मौसम चाहे कड़ाके की ठंड का हो, मूसलाधार बारिश का या फिर बिहार की झुलसाने वाली गर्मी का, स्वीटी के कदम कभी डगमगाए नहीं और उनके इसी जज्बे ने आज उन्हें इस मुकाम पर पहुँचाया है।

Gaya होमगार्ड से शुरू हुआ सफर, बीएसएफ और बिहार पुलिस तक पहुँचा

स्वीटी की प्रतिभा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने बैक-टू-बैक चार बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं को पास किया है:

  1. होमगार्ड सेवा: स्वीटी के करियर की पहली सफलता होमगार्ड भर्ती से शुरू हुई।
  2. बिहार पुलिस चालक (ड्राइवर): इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग में चालक भर्ती परीक्षा को पास किया।
  3. सीमा सुरक्षा बल (BSF): देश सेवा के जज्बे के साथ उन्होंने कठिन शारीरिक और लिखित परीक्षा पास कर बीएसएफ में अपनी जगह बनाई।
  4. बिहार पुलिस (कांस्टेबल): अंततः उन्होंने बिहार पुलिस की मुख्य सिपाही भर्ती परीक्षा में भी सफलता का झंडा गाड़ दिया।

Gaya ज्वाइनिंग को लेकर असमंजस; आगे प्रशासनिक पद पर जाने का है सपना

एक साथ चार-चार नौकरियों के ज्वॉइनिंग लेटर हाथ में होने के कारण स्वीटी के सामने अब यह सुखद असमंजस (कंफ्यूजन) है कि वह किसे चुनें। फिलहाल, उनका इरादा बिहार पुलिस या फिर बीएसएफ (BSF) में से किसी एक को चुनकर देश सेवा की मुख्यधारा में शामिल होने का है।

स्वीटी का कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, नौकरी ज्वाइन करने के बाद भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और भविष्य में किसी बड़े प्रशासनिक पद पर पहुँचकर समाज की सेवा करना चाहती हैं। उनकी इस जादुई सफलता से न सिर्फ उनके माता-पिता की आंखें नम हैं, बल्कि पूरे ग्रामीण परिवेश की बेटियों के भीतर एक नया आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की उम्मीद जाग गई है।

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