रिपोर्टर: रविन्द्र सिंह
Bihar MLC Elections : बिहार के सियासी गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। सूबे में एक सीट पर हुए उपचुनाव सहित बिहार विधान परिषद की सभी 10 सीटों पर एमएलसी (MLC) उम्मीदवारों को निर्विरोध चुन लिया गया है। गुरुवार को नामांकन वापसी की समय सीमा समाप्त होने के बाद निर्वाचन अधिकारी द्वारा सभी प्रत्याशियों की निर्विरोध जीत की आधिकारिक घोषणा कर दी गई। इन सीटों में से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के खाते में 9 सीटें गई हैं, जबकि मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को महज 1 सीट से संतोष करना पड़ा है।
Bihar MLC Elections निशांत कुमार और भोजपुरी स्टार पवन सिंह की सदन में एंट्री
इस चुनाव के जरिए बिहार की राजनीति में कई बड़े चेहरों की एंट्री हुई है। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के बेटे और राज्य के वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार अब आधिकारिक तौर पर विधान परिषद के सदस्य (MLC) बन गए हैं। वहीं दूसरी ओर, बीजेपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे मशहूर भोजपुरी स्टार पवन सिंह ने भी जीत दर्ज कर सदन का टिकट कटा लिया है। 10 सीटों के दलीय समीकरण को देखें तो भाजपा से 4, जदयू से 4, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) से 1 और राजद से 1 उम्मीदवार निर्वाचित घोषित किए गए हैं।
Bihar MLC Elections विजेताओं की पूरी सूची: जानिए कौन-कौन पहुंचा विधान परिषद
बिहार विधान परिषद पहुंचने वाले नवनिर्वाचित सदस्यों की पूरी सूची इस प्रकार है:
- जदयू (JDU): स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, भारती मेहता और शिवानी देवी प्रजापति। वहीं, नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई सीट पर हुए उपचुनाव में जेडीयू के ललन प्रसाद विजयी रहे हैं।
- भाजपा (BJP): भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित।
- लोजपा-आर (LJP-R): चिराग पासवान की पार्टी से अशरफ अंसारी ने जीत दर्ज की है।
- राजद (RJD): विपक्ष की ओर से इकलौते उम्मीदवार के रूप में सुनील सिंह निर्वाचित हुए हैं।
Bihar MLC Elections पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का पद संकट में, नवंबर में छोड़नी पड़ सकती है कुर्सी
इस चुनाव परिणामों के साथ ही बिहार सरकार के एक कैबिनेट मंत्री के राजनीतिक भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के सुप्रीमो और सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश, जो वर्तमान में बिहार की सम्राट चौधरी सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, विधान परिषद के सदस्य बनने से चूक गए हैं।
एनडीए गठबंधन की तरफ से इस बार उन्हें एमएलसी का उम्मीदवार नहीं बनाया गया था। संवैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी गैर-विधायक/गैर-एमएलसी व्यक्ति को मंत्री बनने के छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। दीपक प्रकाश के लिए यह समय सीमा आगामी नवंबर महीने में समाप्त हो रही है। ऐसे में सदन का सदस्य न चुने जाने के कारण अब नवंबर में उन्हें अपने मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।

