Swami Prasad Maurya:उत्तर प्रदेश की राजनीति में स्वामी प्रसाद मौर्य के भविष्य और ‘INDIA’ गठबंधन में उनकी संभावित एंट्री को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है। इस बीच, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने स्पष्ट किया है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की पार्टी ‘अपनी जनता पार्टी’ (AJP) फिलहाल गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
गठबंधन में शामिल होने पर शीर्ष नेतृत्व लेगा अंतिम फैसला
Swami Prasad Maurya:’इंडिया टीवी’ से खास बातचीत के दौरान जब आराधना मिश्रा ‘मोना’ से यह सवाल किया गया कि क्या स्वामी प्रसाद मौर्य कांग्रेस या ‘INDIA’ गठबंधन का हिस्सा बनेंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि गठबंधन में किसे शामिल किया जाना है और किसे नहीं, इस पर अंतिम फैसला ‘INDIA’ ब्लॉक का शीर्ष नेतृत्व ही बैठकर तय करेगा।
आराधना मिश्रा ने यह भी संकेत दिए कि आगामी चुनावों को लेकर कांग्रेस और अन्य दलों के बीच अंदरखाने बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सीटों का तालमेल भी फाइनल हो जाएगा और इस संबंध में पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी के साथ भी चर्चा हुई है।
कांग्रेस नेताओं के लगातार संपर्क में हैं स्वामी प्रसाद मौर्य
Swami Prasad Maurya:सपा प्रमुख अखिलेश यादव की स्पष्ट आपत्तियों के बावजूद, कांग्रेस के कई नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। हाल ही में मौर्य ने दिल्ली में कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम की मौजूदगी में राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद दो नवंबर को राजेंद्र पाल गौतम ने फिर से मौर्य से मुलाकात की।
सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने बताया था कि उन्होंने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक हालात और आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीति पर चर्चा की है। इस मुलाकात का बचाव करते हुए राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि वे उन लोगों से मेलजोल बंद नहीं कर सकते, जिनके साथ उन्होंने वर्षों तक सामाजिक न्याय के मुद्दों पर काम किया है।
अखिलेश यादव क्यों कर रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य का विरोध?
Swami Prasad Maurya:इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में समाजवादी पार्टी (SP) और अखिलेश यादव का कड़ा रुख है। अखिलेश यादव ने स्वामी प्रसाद मौर्य को गठबंधन में शामिल करने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। लखनऊ में एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने साफ कहा था कि पार्टी के सीट-बंटवारे के समीकरण में मौर्य के लिए कोई जगह नहीं है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य के बयानों और सपा नेतृत्व के साथ उनके पुराने मतभेदों के चलते अखिलेश यादव उनसे दूरी बनाए हुए हैं। बहरहाल, सपा प्रमुख के कड़े विरोध के बावजूद कांग्रेस का मौर्य के प्रति नरम रुख 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले ‘INDIA’ गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और रणनीतिक फैसलों को लेकर खींचतान को और बढ़ा सकता है।

