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रिपोर्टर: विपिन साहू

Mineral Wealth : भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा का विशाल खजाना मौजूद है। जहाँ मध्य प्रदेश तांबे के उत्पादन में अग्रणी है, वहीं छत्तीसगढ़ लौह अयस्क और टिन के लिए पहचाना जाता है; इसके अलावा राजस्थान सीसा-जस्ता जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में मजबूत स्थिति में है। बावजूद इसके, देश को अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हर साल भारी मात्रा में धातुओं और अयस्कों का विदेशों से आयात करना पड़ता है।

नीति आयोग की ‘ट्रेड वॉच क्वार्टरली’ रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में भारत का धातु और अयस्क आयात लगभग दोगुना होकर 60.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि देश में खनिजों की कमी नहीं है, बल्कि असली चुनौती कच्चे खनिजों को उपयोगी और मूल्यवान उत्पादों में बदलने यानी ‘वैल्यू एडिशन’ (Value Addition) की क्षमता बढ़ाने की है।

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान की खनिज क्षमता

Mineral Wealth देश के खनिज मानचित्र पर इन तीनों राज्यों की भूमिका बेहद अहम है। रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश की देश के कुल तांबा अयस्क उत्पादन में करीब 76.6 प्रतिशत हिस्सेदारी है, साथ ही यह मैंगनीज और फॉस्फोराइट उत्पादन में भी प्रमुख स्थान रखता है। इसी तरह, छत्तीसगढ़ देश के कुल लौह अयस्क उत्पादन का 15.1 प्रतिशत और टिन अयस्क का शत-प्रतिशत उत्पादन करता है।

दूसरी ओर, राजस्थान सीसा-जस्ता अयस्क के साथ-साथ सेलेनाइट और गार्नेट के उत्पादन में 100 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सबसे मजबूत स्थिति में है। इन राज्यों के पास उद्योगों का एक मजबूत आधार होने के बावजूद, केवल कच्चे रूप में खनिज निकालने तक सीमित रहने के कारण वे अपनी आर्थिक क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

वैल्यू एडिशन और औद्योगिक विकास के रास्ते की बाधाएं

Mineral Wealth खनिज संपदा से भरपूर इन राज्यों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल को प्रोसेस कर फिनिश्ड गुड्स (तैयार सामान) तैयार करने की है। वर्तमान में खनन से जुड़े उत्पादों को बाहर भेजा जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर मिलने वाला अधिकतम आर्थिक लाभ कम हो जाता है। नीति आयोग की रिपोर्ट में जिन प्रमुख बाधाओं का जिक्र किया गया है, उनमें नई परियोजनाओं और खदानों से जुड़ी मंजूरियों में लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया, परिवहन तथा ऊर्जा की उच्च लागत शामिल हैं।

इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने उत्पादों को उतारने के लिए वैश्विक पर्यावरण मानकों, जैसे कि यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसी चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीक और भारी निवेश की आवश्यकता है।

रोजगार और आर्थिक मजबूती के लिए आगे की राह

Mineral Wealth यदि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान केवल खनन पर निर्भर रहने के बजाय खदानों के आसपास ही प्रसंस्करण इकाइयां (Processing Units) और खनिज-आधारित उद्योग विकसित करें, तो तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, बल्कि परिवहन, मशीनरी रखरखाव और अन्य सहायक सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। इन राज्यों के लिए यह समय की मांग है कि वे आधुनिक तकनीक, समयबद्ध स्वीकृतियों और रणनीतिक निवेश को प्राथमिकता दें, ताकि खनिज संपदा का वास्तविक लाभ देश के औद्योगिक विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों को मिल सके।

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