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रिपोर्टर: मयंक गुप्‍ता

MP High Court : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अध्यापक संवर्ग के शिक्षकों के हित में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों को 1 जनवरी 2006 से छठे वेतनमान का लाभ दिया जाए। हाईकोर्ट ने इस आदेश का पालन करने के लिए सरकार को चार हफ्ते की अंतिम मोहलत दी है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन नहीं किया गया, तो स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव को खुद अदालत में हाजिर होकर जवाब देना होगा।

2006 की जगह 2016 से दिया जा रहा था लाभ, सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज हुई थी अपील

शिक्षकों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता के अनुसार, छठे वेतनमान की शुरुआत 1 जनवरी 2006 से हुई थी, लेकिन सरकार शिक्षकों को इसका लाभ 2016 से दे रही थी। इसके खिलाफ 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था, जिसके खिलाफ राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने भी अगस्त 2026 में सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बावजूद आदेश लागू न होने पर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यह सख्त रुख अपनाया है।

70 हजार शिक्षकों को मिलेगा बड़ा फायदा, एरियर के रूप में मिल सकते हैं लाखों रुपये

इस फैसले से राज्य के लगभग 70 हजार अध्यापकों को सीधा और बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा। शिक्षकों को 10 साल का बकाया एरियर मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रत्येक शिक्षक को अनुमानित 7 से 8 लाख रुपये तक की एरियर्स राशि मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, प्रथम नियुक्ति की तिथि से वरिष्ठता और सेवा अवधि की गणना होने के कारण शिक्षकों के मासिक वेतन में 15 से 20 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होगी। साथ ही, पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में भी सुधार होगा।

पहली नियुक्ति से सेवा गणना की लंबे समय से थी मांग

उल्लेखनीय है कि ये शिक्षक पूर्व में पंचायत विभाग के तहत कार्यरत थे और वर्ष 2016 में इन्हें शिक्षा विभाग में शामिल किया गया था। लेकिन शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान उनकी 2016 से पहले की सेवा अवधि को उचित मान्यता नहीं दी गई थी, जिससे वे वरिष्ठता और वेतन वृद्धि से वंचित रह गए थे। शिक्षक लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उनकी पहली नियुक्ति की तिथि से ही सेवा अवधि की गणना की जाए। अब कोर्ट के इस आदेश के बाद शिक्षकों को अपनी पुरानी सेवा का पूरा अधिकार और रुका हुआ बकाया मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

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