रिपोर्टर: योगेन्द्र सिंह
Raipur : इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) रायपुर में स्नातक (UG) द्वितीय सेमेस्टर के परीक्षा परिणामों में गड़बड़ी और देरी को लेकर विद्यार्थियों का गुस्सा फूट पड़ा। ‘छात्र अधिकार मंच’ के बैनर तले विभिन्न महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने प्रशासनिक भवन के समक्ष जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही तरीके से नहीं हुआ है, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों के सामने ईयर बैक का खतरा मंडराने लगा है। छात्रों ने कुलपति और परीक्षा नियंत्रक को अपनी 5 सूत्रीय मांगों से अवगत कराया है।
50 दिनों की देरी और मूल्यांकन में विसंगतियों का आरोप
Raipur छात्रों का कहना है कि यूजी प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के परिणामों को घोषित करने में विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगभग 50 दिनों की देरी की। इसके बाद जो परिणाम सामने आए, उसमें भारी विसंगतियां देखने को मिल रही हैं। मूल्यांकन में कथित गलतियों के कारण कई मेधावी छात्र भी अनुत्तीर्ण या ईयर बैक की श्रेणी में आ गए हैं। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन त्रुटियों को सुधारकर संशोधित परिणाम जारी नहीं किए गए, तो उनका एक पूरा शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो जाएगा।
छात्रों की 5 प्रमुख मांगें
- कॉपियों की पुनः निष्पक्ष जांच: सभी प्रभावित छात्रों की उत्तरपुस्तिकाओं का पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से दोबारा मूल्यांकन किया जाए।
- सत्र 2025-26 के लिए ईयर बैक की समाप्ति: इस विशेष सत्र के लिए ईयर बैक के कड़े नियमों को पूरी तरह से निरस्त या शिथिल किया जाए।
- चार विषयों में री-इवेvaluation और शुल्क माफी: पुनर्मूल्यांकन की सुविधा दो विषयों से बढ़ाकर चार विषयों तक की जाए और इसके लिए लिया जाने वाला शुल्क माफ हो।
- ग्रेस मार्क्स का दायरा बढ़ाना: पांच अंकों की ग्रेस मार्क्स सीमा को बढ़ाने के साथ-साथ इसे दो से अधिक विषयों पर लागू किया जाए।
- आरटीआई में रेफरेंस बुक की बाध्यता हटाना: उत्तर पुस्तिका देखने या आपत्ति जताने के दौरान रेफरेंस बुक देने की अनिवार्य शर्त हटाई जाए, क्योंकि कई कॉलेजों में ये पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं।
प्रशासनिक निर्णय का इंतजार
Raipur विद्यार्थियों ने स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष मूल्यांकन उनका बुनियादी अधिकार है और जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, वे अपना रुख सख्त रखेंगे। फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों पर कोई आधिकारिक बयान या निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन छात्रों को उम्मीद है कि प्रशासन उनके भविष्य को ध्यान में रखते हुए सकारात्मक कदम उठाएगा।

