Skill Development and Employment SchemeSkill Development and Employment Scheme
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Skill Development and Employment Scheme:लखनऊ: उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करने के उद्देश्य से कौशल विकास एवं रोजगार व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों को नौ जोन में बांटकर उद्योगों की जरूरत के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में पांच प्रमुख स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस परियोजना पर अगले तीन वर्षों में करीब 1,725 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

MSME सेक्टर को मिलेगा प्रशिक्षित कर्मचारियों का सहारा

Skill Development and Employment Scheme:उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक गतिविधियों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र की अहम भूमिका है। प्रदेश में लगभग 96 लाख MSME उद्यम संचालित हैं, जो देश के कुल करीब 6.77 करोड़ उद्यमों का लगभग 14.2 प्रतिशत हैं।

औद्योगिक उत्पादन में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत और निर्यात में लगभग 45 प्रतिशत बताई गई है। साथ ही, तीन करोड़ से अधिक लोग इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। ऐसे में उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना और उन्हें रोजगार से जोड़ना इस योजना का प्रमुख उद्देश्य है।

नौ जोन में विकसित होगा कौशल प्रशिक्षण का नेटवर्क

Skill Development and Employment Scheme:योजना के तहत उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों को नौ जोन में विभाजित करके हब एवं स्पोक मॉडल पर कौशल विकास और रोजगार का एकीकृत ढांचा तैयार किया जाएगा। प्रत्येक जोन में स्थानीय उद्योगों, बाजार की मांग और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

इस व्यवस्था से उद्योगों, विभिन्न बाजार क्षेत्रों और सरकारी विभागों की मानव संसाधन संबंधी जरूरतों का आकलन किया जा सकेगा। इसके आधार पर युवाओं को प्रासंगिक कौशल सिखाकर रोजगार के अवसरों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा।

पहले चरण में इन पांच शहरों में खुलेंगे केंद्र

Skill Development and Employment Scheme:परियोजना के शुरुआती चरण में पांच स्थानों पर कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र स्थापित करने की योजना है।

  • लखनऊ: सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के माध्यम से केंद्र स्थापित किया जाएगा।
  • कानपुर: सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल के तहत केंद्र विकसित होगा।
  • गोरखपुर: गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।
  • गौतमबुद्ध नगर: नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) के संयुक्त सहयोग से केंद्र बनाया जाएगा।
  • झांसी: बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) की ओर से केंद्र स्थापित किया जाएगा।

इस तरह बांटे गए हैं प्रदेश के नौ जोन

Skill Development and Employment Scheme:योजना के अंतर्गत जिलों और मंडलों को उनकी भौगोलिक स्थिति के आधार पर नौ जोन में रखा गया है।

  1. जोन-1: गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद और हापुड़।
  2. जोन-2: सहारनपुर मंडल, बुलंदशहर, बागपत और मेरठ।
  3. जोन-3: मुरादाबाद और बरेली मंडल।
  4. जोन-4: आगरा और अलीगढ़ मंडल।
  5. जोन-5: लखनऊ और अयोध्या मंडल।
  6. जोन-6: कानपुर और प्रयागराज मंडल।
  7. जोन-7: चित्रकूट, विंध्याचल और झांसी मंडल।
  8. जोन-8: वाराणसी और आजमगढ़ मंडल।
  9. जोन-9: गोरखपुर, बस्ती और देवीपाटन मंडल।

10 से 25 एकड़ जमीन पर बनेंगे प्रशिक्षण केंद्र

Skill Development and Employment Scheme:प्रत्येक कौशल प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए 10 से 25 एकड़ तक उपयुक्त और भारमुक्त भूमि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने के लिए नजदीकी राजमार्ग या एक्सप्रेसवे से दो साल के भीतर चार लेन की सड़क संपर्क सुविधा उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है।

इन केंद्रों का निर्माण और संचालन सार्वजनिक-निजी सहभागिता पर आधारित डिजाइन, निर्माण, वित्तपोषण, संचालन एवं हस्तांतरण (DBFOT) मॉडल या सरकारी संस्थाओं के माध्यम से किया जा सकेगा।

तकनीकी के साथ भाषा और गैर-तकनीकी प्रशिक्षण पर भी जोर

Skill Development and Employment Scheme:योजना में अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी। मानविकी और वाणिज्य जैसे गैर-तकनीकी विषयों से पढ़ाई करने वाले युवाओं को बुनियादी कौशल सिखाए जाएंगे।

वहीं, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुके युवाओं को तकनीकी कौशल उन्नयन का अवसर मिलेगा। देश के दूसरे राज्यों और विदेशों में उपलब्ध नौकरियों की मांग के मुताबिक भारतीय भाषाओं के साथ विदेशी भाषाओं का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

प्रशिक्षण केंद्रों में छात्रावास की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ सेवायोजन कार्यालय और प्लेसमेंट सेल भी स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, देश और विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने वाली मान्यता प्राप्त एजेंसियों के साथ समन्वय करके प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी के अवसरों से जोड़ने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

तीन साल में 1,725 करोड़ रुपये खर्च करने का अनुमान

Skill Development and Employment Scheme:इस परियोजना पर आगामी तीन वर्षों के दौरान कुल 1,725 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। जरूरत पड़ने पर निजी विकासकर्ताओं और प्रशिक्षण प्रदाताओं को वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) भी दी जा सकेगी, ताकि परियोजना के विकास और संचालन में आर्थिक सहायता मिल सके।

योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य, जिला और परियोजना स्तर पर निगरानी एवं समन्वय की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत केंद्रों की स्थापना, संचालन, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी।

AI और डिजिटल तकनीक से होगी निगरानी

Skill Development and Employment Scheme:कौशल प्रशिक्षण और रोजगार व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए डिजिटल डैशबोर्ड, डेटा विश्लेषण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इस उद्देश्य से उपयुक्त प्रौद्योगिकी भागीदार के चयन का प्रावधान भी किया गया है।

सरकार की इस पहल का उद्देश्य उद्योगों की बदलती जरूरतों के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित करना, रोजगार से जुड़े कौशल में सुधार लाना और प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ रोजगार के अवसरों का विस्तार करना है।

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