PVTG Women Empowerment in ChhattisgarhPVTG Women Empowerment in Chhattisgarh
Spread the love

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:छत्तीसगढ़ में विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी PVTG समुदाय की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। इसके तहत महिलाओं को पुराने और अनुपयोगी कपड़ों से सॉफ्ट टॉय और दूसरी उपयोगी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

ग्रामोद्योग विभाग और हैंडलूम फेडरेशन की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा कौशल देना है, जिससे वे अपने गांव और घर से ही काम कर सकें। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें सिलाई मशीन, जरूरी कच्चा माल और बाजार से मिलने वाले ऑर्डर उपलब्ध कराने की योजना है।

30 महिलाओं के पहले बैच को मिली ट्रेनिंग

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:इस कार्यक्रम के शुरुआती चरण में PVTG समुदाय की 30 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, आगे हर महीने 30 महिलाओं को इस तरह का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई गई है।

प्रशिक्षण के जरिए महिलाओं को सिलाई मशीन चलाने के साथ-साथ कपड़ों से अलग-अलग तरह के खिलौने और सजावटी सामान बनाने की तकनीक सिखाई जा रही है।

रायपुर और जगदलपुर से शुरू हुआ कार्यक्रम

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:फिलहाल प्रशिक्षण की शुरुआत रायपुर और जगदलपुर में की गई है। आने वाले समय में इसे सरगुजा, बिलासपुर और रायगढ़ तक विस्तार देने की तैयारी है। इससे अधिक संख्या में PVTG महिलाओं को इस रोजगारपरक पहल से जोड़ने का रास्ता खुलेगा।

ट्रेनिंग के बाद घर पर मिलेगी मशीन

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:ग्रामोद्योग विभाग के सचिव राजेश राणा के मुताबिक, प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं के घर पर सिलाई मशीन उपलब्ध कराने की योजना है। उन्हें खिलौने बनाने के लिए आवश्यक सामग्री भी दी जाएगी।

बाजार से मिलने वाले ऑर्डर भी महिलाओं तक पहुंचाए जाएंगे, ताकि उन्हें तैयार सामान बेचने के लिए अलग से बाजार तलाशने की जरूरत न पड़े। इस व्यवस्था से महिलाएं घर से ही उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी।

15 दिन में सीखा सॉफ्ट टॉय बनाने का हुनर

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:सुकमा जिले से प्रशिक्षण लेने पहुंची मार्कम संगीता ने बताया कि उन्होंने 15 दिन के कार्यक्रम के दौरान सिलाई, चरखे के इस्तेमाल और सॉफ्ट टॉय बनाने की बारीकियां सीखीं।

उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण से पहले वह घर पर ही रहती थीं और गांव में रोजगार के सीमित विकल्प होने के कारण उन्हें मजदूरी भी करनी पड़ती थी। अब उन्हें सिलाई का नया कौशल मिला है, जिससे घर से कमाई करने की उम्मीद बढ़ी है।

खिलौनों के साथ कई उपयोगी चीजें भी तैयार

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सिर्फ सॉफ्ट टॉय ही नहीं, बल्कि कई तरह की दूसरी वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें पक्षी, हाथी, मछली, टेडी बियर और हेयर क्लिप जैसे उत्पाद शामिल हैं।

कोरबा जिले की गायत्री कुमारी कोरवा ने भी प्रशिक्षण को उपयोगी बताते हुए कहा कि उनके गांव में रोजगार के अवसर कम हैं। प्रशिक्षण के बाद उन्होंने कई नए उत्पाद तैयार करना सीखा है।

पुराने कपड़ों से बनेगा कमाई का साधन

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:इस योजना की खास बात यह है कि हैंडलूम गतिविधियों से निकलने वाले अनुपयोगी कपड़ों को फेंकने के बजाय उनका दोबारा इस्तेमाल किया जाएगा। इन्हीं कपड़ों को सॉफ्ट टॉय और अन्य उत्पादों में बदलकर बाजार तक पहुंचाया जाएगा।

तैयार उत्पादों को ‘कौशल’ ब्रांड के तहत ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार में बेचने की योजना है। इससे एक ओर कपड़ों के पुन: उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर PVTG महिलाओं के लिए स्थायी आय का नया माध्यम विकसित हो सकता है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

PVTG Women Empowerment in Chhattisgarh:इस पहल का फोकस केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। महिलाओं को मशीन, कच्चा माल और ऑर्डर से जोड़कर उन्हें उत्पादन और कमाई की पूरी प्रक्रिया का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है।

अगर योजना के अनुसार बाजार से लगातार ऑर्डर मिलते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को अपने घर से ही रोजगार हासिल करने का अवसर मिल सकता है। साथ ही इससे परिवार की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने में मदद मिलने की उम्मीद है।

read this:- MP Weather Update: मानसून विदा होते ही बदला मौसम, रातें ठंडी और दिन में बढ़ी गर्मी