Madhya Pradesh Government Action:मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में अचानक फैली बीमारी और बुखार के मामलों पर नियंत्रण पाने के लिए राज्य सरकार ने तेजी से कदम उठाए हैं। प्रशासन ने तुरंत प्रभाव से डिस्ट्रिक्ट रैपिड रिस्पॉन्स टीम (DRRT) को सक्रिय किया, जिसके तहत बाल रोग विशेषज्ञों, महामारी वैज्ञानिकों और कीट वैज्ञानिकों की विशेष टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद स्थिति का संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
57 मेडिकल टीमों द्वारा व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान
Madhya Pradesh Government Action:प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति से निपटने के लिए 57 विशेष स्वास्थ्य दलों ने करीब 50 गांवों का दौरा किया। इस दौरान कुल 43,451 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की गई:
- घरेलू उपचार और अस्पताल में भर्ती: लगभग 6,537 लोगों का घर पर ही इलाज किया गया, जबकि गंभीर रूप से बीमार 647 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
- टीकाकरण और बचाव: बिरसा विकासखंड के 35,827 बच्चों को खसरा-रूबेला का टीका लगाया गया। इसके साथ ही दस्त से बचाव के लिए 1,63,902 परिवारों को ओआरएस (ORS) और जिंक के पैकेट बांटे गए।
- मलेरिया नियंत्रण: 8,610 घरों में कीटनाशक का छिड़काव और फॉगिंग की गई। मलेरिया के लिए 26,865 लोगों की जांच हुई, जिनमें से 980 संक्रमित मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया गया और 3,600 मच्छरदानियां वितरित की गईं।
स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और चिकित्सा सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण
Madhya Pradesh Government Action:संकट से निपटने के लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर वित्तीय और ढांचागत सुधार किए हैं। बैहर, बिरसा और कटंगी विकासखंडों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के सुरक्षित परिवहन के लिए 3.60 लाख रुपये और टीकों के सुरक्षित परिवहन के लिए 3.40 लाख रुपये दिए गए।
इसके अलावा, जिले के 22 उप-स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए 1.93 करोड़ रुपये और आवश्यक उपकरणों के लिए 24 लाख रुपये स्वीकृत किए गए। स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से जिले में 54 नए डॉक्टरों की पदस्थापना की गई है, साथ ही महिला बाल विकास विभाग के तहत नए सीडीओपी और आंगनवाड़ियों में कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के रिक्त पदों को भरा गया है।
दो दशकों में स्वास्थ्य संकेतकों में आया ऐतिहासिक सुधार
Madhya Pradesh Government Action:जुलाई के दूसरे सप्ताह में बिरसा विकासखंड के कई गांवों में बच्चों में बुखार और दाने की शिकायतें मिलने के बाद भारी बारिश और दुर्गम रास्तों के बावजूद स्वास्थ्य टीमों ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और पिछले दो दशकों में स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए सुधारों के कारण बालाघाट ने मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है:
- संस्थागत प्रसव: वर्ष 2003 में यह आंकड़ा मात्र 21.50 प्रतिशत था, जो बढ़कर 92.10 प्रतिशत हो गया है।
- पूर्ण टीकाकरण: बच्चों का टीकाकरण 47.50 प्रतिशत से बढ़कर 92.70 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
- मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी: वर्ष 2003 की तुलना में मातृ मृत्यु के मामलों में भारी गिरावट आई है, जिससे हर साल दर्जनों महिलाओं और हजारों शिशुओं की जान बचाई जा रही है।
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