Ghaziabad AccidentGhaziabad Accident
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Ghaziabad Accident:गाजियाबाद के साहिबाबाद रैपिड मेट्रो स्टेशन के पास हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में 24 वर्षीय युवक तुषार कुमार की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना ने एक तरफ जहां लापरवाह ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पतालों की कार्यशैली और इलाज के खर्च को लेकर भी गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है।

सड़क हादसे और इलाज के दौरान क्या हुआ?

Ghaziabad Accident:मृतक तुषार कुमार अपने कार्यालय से घर लौट रहे थे। 19 सितंबर की रात करीब 2:30 बजे, साहिबाबाद रैपिड रेल (नमो भारत) स्टेशन के पास एक अज्ञात वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। राहगीर रोहित शर्मा की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवक को पहले वसुंधरा के एक निजी अस्पताल ले गई, जहां सर्जन न होने के कारण उसे भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद पुलिस तुषार को इंदिरापुरम के यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ले गई, जहां उनका इलाज शुरू हुआ।

पिता के गंभीर आरोप: बिल और पैसे के लिए दबाव

Ghaziabad Accident:मृतक के पिता शिव कुमार ने यशोदा मेडिसिटी अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार:

  • शुरुआती बिल: अस्पताल में बेटे को भर्ती कराए मात्र 30 से 35 मिनट ही हुए थे कि उन्हें 47,800 रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया।
  • सरकारी अस्पताल रेफर करने की गुहार: गरीब आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए पिता ने बेटे को किसी सरकारी अस्पताल या एमएमजी अस्पताल रेफर करने का अनुरोध किया था, ताकि वे पैसों का इंतजाम कर सकें। आरोप है कि अस्पताल ने उनकी इस बात को अनसुना कर दिया।
  • जमीन गिरवी रखकर चुकाए पैसे: मजबूर पिता ने साहूकार के पास अपनी जमीन गिरवी रखकर ब्याज पर पैसे जुटाए और अस्पताल का बिल चुकाया। इसके बाद एंबुलेंस के जरिए तुषार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, जहां 20 सितंबर की शाम इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अस्पताल का पक्ष

Ghaziabad Accident;दूसरी ओर, यशोदा मेडिसिटी अस्पताल ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए अपना अलग बयान जारी किया है। अस्पताल का कहना है कि मरीज के अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने तुरंत उसकी जांच की और हरसंभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई। अस्पताल के मुताबिक, परिजनों को आर्थिक रियायत भी दी गई थी, लेकिन डॉक्टरों की सलाह के बावजूद परिवार ने अपनी इच्छा से मरीज को ‘LAMA’ (Leave Against Medical Advice – चिकित्सीय सलाह के खिलाफ अस्पताल छोड़ना) के तहत डिस्चार्ज करवा लिया था।

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