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रिपोर्टर: अजीत कुमार ठाकुर

Supaul : बिहार के सुपौल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य महारास लीला का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा व्यास सोनम जी के मुखारविंद से महारास का आध्यात्मिक रहस्य सुनकर पूरा कथा पंडाल भक्ति और अध्यात्म के अनूठे रंग में रंग गया। इस दौरान श्रद्धालुओं के राधे-कृष्ण के जयकारों से पूरा माहौल गुंजायमान रहा।

जीवात्मा और परमात्मा के अनूठे मिलन का प्रतीक है महारास

Supaul कथा व्यास सोनम जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महारास को महज एक साधारण नृत्य लीला समझना भूल होगी। वास्तव में यह जीवात्मा और परमात्मा के बीच के पवित्र संबंध, पूर्ण समर्पण और निष्काम प्रेम का प्रतीक है। उन्होंने शरद पूर्णिमा की रात्रि का वर्णन करते हुए बताया कि कैसे श्रीकृष्ण की मुरली की तान सुनकर गोपियां अपने सारे सांसारिक बंधनों और अहंकार को त्यागकर ईश्वर की भक्ति में लीन हो गईं।

सांसारिक मोह-माया छोड़कर ईश्वर शरण में जाने की सीख

Supaul व्यास जी ने कहा कि महारास का संदेश वर्तमान युग में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना द्वापर युग में था। जब मनुष्य अपने भीतर के लोभ, मोह, अहंकार और स्वार्थ का त्याग कर परमात्मा के चरणों में समर्पित होता है, तभी उसके जीवन में वास्तविक शांति और प्रेम का संचार होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से श्रीकृष्ण के बताए सेवा, भक्ति और सद्भाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।

मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मीना बाजार और झूले बने आकर्षण

Supaul कथा के साथ-साथ आयोजन स्थल पर भव्य मेले का भी आयोजन किया गया है। शाम होते ही मेले में बच्चों और परिवारों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। मेले में टोरा-टोरा, सुनामी और टावर झूलों के साथ-साथ बच्चों के लिए मिकी माउस और हाथी-घोड़े की सवारियां मुख्य आकर्षण बनी हुई हैं। इसके अलावा महिलाओं के लिए मीना बाजार में घरेलू सजावटी सामान और विभिन्न प्रकार की दुकानों पर जमकर खरीदारी हो रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष राम लखन चौधरी, सचिव ललन कुमार और अन्य सदस्य व्यवस्था को सुचारु बनाने में लगातार जुटे हुए हैं।

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