Seema Pahuja CBI Officer: दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले की जांच एक बार फिर चर्चा में है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस मामले में FIR दर्ज करने के बाद जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब इस केस की निगरानी की जिम्मेदारी CBI की वरिष्ठ अधिकारी सीमा पाहुजा को दी गई है।
सीमा पाहुजा का नाम इससे पहले भी कई चर्चित और संवेदनशील मामलों की जांच से जुड़ा रहा है। उनके अनुभव को देखते हुए दिशा सालियान मामले की जांच में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कौन हैं सीमा पाहुजा?
Seema Pahuja CBI Officer:सीमा पाहुजा वर्तमान में CBI मुख्यालय, दिल्ली की Special Crimes Unit में SP के पद पर कार्यरत बताई जाती हैं। इससे पहले वह CBI की चंडीगढ़ यूनिट में भी सेवाएं दे चुकी हैं।
उनके करियर में कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक मामलों की जांच शामिल रही है। इनमें उत्तर प्रदेश का हाथरस मामला, उन्नाव रेप केस और कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल से जुड़ा रेप-मर्डर मामला शामिल है।
इसके अलावा सीमा पाहुजा का नाम शिमला के चर्चित ‘गुड़िया’ रेप-मर्डर केस की जांच से भी जुड़ा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले की जांच में उनकी टीम ने फोरेंसिक तकनीक का इस्तेमाल किया था। उन्हें 2021 में Best Investigating Officer के गोल्ड मेडल से सम्मानित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
दिशा सालियान केस में अब क्या होगा?
Seema Pahuja CBI Officer:दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को हुई थी। वह अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं। मामले में CBI की FIR दर्ज होने के बाद एजेंसी अब उपलब्ध रिकॉर्ड और सबूतों की नए सिरे से जांच करेगी।
जांच के दौरान उन लोगों से पूछताछ की जा सकती है, जो घटना से पहले दिशा सालियान के मंगेतर रोहन रॉय के घर आयोजित पार्टी में मौजूद थे। इसके अलावा उस समय की पुलिस जांच से जुड़े दस्तावेज, घटनास्थल के रिकॉर्ड, फोरेंसिक सामग्री और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी समीक्षा की जाएगी।
छह साल पुराने मामले में CBI के सामने चुनौती
Seema Pahuja CBI Officer:दिशा सालियान की मौत को छह साल से अधिक समय बीत चुका है। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने पुराने रिकॉर्ड, सबूत और गवाहों से जुड़ी जानकारी को दोबारा जुटाने और सत्यापित करने की चुनौती होगी।
CBI मामले से संबंधित दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड एकत्र करने की प्रक्रिया में जुटी है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
FIR में नाम होने का मतलब आरोपी होना नहीं
Seema Pahuja CBI Officer:इस मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू यह है कि FIR में किसी व्यक्ति का नाम या किसी आरोप का उल्लेख होना अपने आप में उसे आरोपी घोषित नहीं करता। किसी व्यक्ति की भूमिका जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
अब नजर इस बात पर है कि CBI की जांच में छह साल पुरानी घटना से जुड़े कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और उपलब्ध साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल से मामले की तस्वीर किस तरह स्पष्ट होती है।

