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रिपोर्टर: विपिन साहू

Delhi : भारत ने चीन के सामने ब्रह्मपुत्र (यारलुंग त्सांगपो) नदी के हाइड्रोलॉजिकल डेटा को साझा करने का मुद्दा मजबूती से उठाया है। नई दिल्ली में आयोजित ‘भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र’ (WMCC) की 36वीं बैठक के दौरान भारत ने जलप्रवाह से जुड़े आंकड़े तत्काल उपलब्ध कराने और इस विषय पर विशेषज्ञ स्तरीय बैठक आयोजित करने पर जोर दिया।

Delhi तीन वर्षों से चीन ने नहीं साझा किए हाइड्रोलॉजिकल आंकड़े

विदेश मंत्रालय के अनुसार, पड़ोसी देश चीन ने जून 2023 के बाद से ब्रह्मपुत्र नदी के जलप्रवाह से संबंधित कोई भी डेटा भारत के साथ साझा नहीं किया है। भारत का कहना है कि यह नदी पूर्वोत्तर भारत के लाखों लोगों की आजीविका, जल सुरक्षा और पारिस्थितिकी का मुख्य आधार है। ऊपरी प्रवाह वाले क्षेत्रों में पारदर्शिता की कमी और चीनी परियोजनाओं के चलते भारत में बाढ़ नियंत्रण तथा पर्यावरण सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।

Delhi ब्रह्मपुत्र पर दुनिया के सबसे बड़े बांध का निर्माण

चीन अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली यारलुंग त्सांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी पर लगभग 178 बिलियन डॉलर की लागत से एक विशालकाय पनबिजली बांध का निर्माण कर रहा है। यह दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है। भारत ने आशंका जताई है कि बिना किसी पूर्व सूचना या डेटा के इतना बड़ा निर्माण निचले तटीय क्षेत्रों (डाउनस्ट्रीम) के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

एलएसी पर शांति और कूटनीतिक संवाद पर बनी सहमति

WMCC की इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (पूर्व एशिया) सुजीत घोष ने और चीनी दल का नेतृत्व होउ यांकी ने किया। वार्ता के दौरान दोनों देशों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से जुड़े बाकी मुद्दों को जल्द सुलझाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों पक्षों ने माना कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनाए रखना द्विपक्षीय संबंधों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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