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रिपोर्टर: अभय भाटिया

New Delhi : दुष्कर्म मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे स्वयंभू संत आसाराम की मेडिकल रिपोर्ट अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दी है। एम्स की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि आसाराम को फिलहाल अस्पताल में भर्ती (Admit) करने की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए चौबीसों घंटे प्रशिक्षित केयरगिवर्स (देखभाल करने वाले) की सहायता जरूरी बताई गई है।

New Delhi एम्स की मेडिकल रिपोर्ट: आसाराम को हैं ये गंभीर बीमारियाँ

सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एम्स की विस्तृत रिपोर्ट में आसाराम की शारीरिक स्थिति और बीमारियों की पूरी सूची दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 80 से अधिक वर्षीय आसाराम निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं:

  • हृदय रोग: कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease)
  • हड्डियों की कमजोरी: ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)
  • सोडियम का असंतुलन: क्रॉनिक हाइपोनेट्रेमिया (लंबे समय से शरीर में सोडियम की कमी)
  • रक्त से जुड़ी समस्या: थैलेसीमिया और बार-बार होने वाली एनीमिया (खून की कमी)
  • पाचन तंत्र: पेट से संबंधित बार-बार होने वाली जटिलताएँ

New Delhi राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी गई है चुनौती

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। आसाराम ने राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था। याचिका में उन्होंने सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की गुहार लगाई है।

मंगलवार को सुनवाई के दौरान एम्स की रिपोर्ट तो कोर्ट के समक्ष आ गई, लेकिन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अनुपलब्धता के कारण शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई गुरुवार तक के लिए टाल दी।

क्या था पूरा मामला और हाईकोर्ट का रुख?

गौरतलब है कि यह मामला वर्ष 2013 का है, जब उत्तर प्रदेश की एक नाबालिग छात्रा ने जोधपुर स्थित आश्रम में आसाराम पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इस मामले ने पूरे देश में तूल पकड़ा था। लंबी सुनवाई के बाद जोधपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को दोषी ठहराते हुए ताउम्र कैद की सजा सुनाई थी।

बीते मई महीने में राजस्थान हाईकोर्ट ने आसाराम की अपील पर फैसला सुनाते हुए गैंगरेप की धाराओं को हटा दिया था, लेकिन पॉक्सो और अन्य गंभीर आरोपों के तहत मिली उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था तथा तुरंत आत्मसमर्पण (Surrender) करने का निर्देश दिया था।

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