रिपोर्टर: गनेश सिंह
Delhi : मेघालय के बहुचर्चित राजा रघुवंशी मर्डर केस में शीर्ष अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी सोनम रघुवंशी की जमानत को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे दो टूक विकल्प दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी के पास अब आगे बढ़ने के केवल दो ही कानूनी रास्ते बचे हैं।
Delhi जस्टिस एमएम सुंदेश की पीठ का कड़ा रुख, दो विकल्पों की दी पेशकश
जस्टिस एमएम सुंदेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने सोनम के वकील से सीधे तौर पर कहा कि अदालत या तो उनकी जमानत रद्द करने की मांग वाली मेघालय सरकार की अपील पर गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर तुरंत आदेश सुनाएगी, या फिर जमानत अर्जी पर अंतिम फैसले तक सोनम को सरेंडर कर जांच में सहयोग करना होगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
“आपके पास दो स्पष्ट विकल्प हैं—या तो हम दलीलों के आधार पर फैसला पारित करें, या फिर आप तुरंत आत्मसमर्पण करें ताकि पुलिस गवाहों और सबूतों के सिलसिले में आपसे पूछताछ कर सके।”
इस पर सोनम के वकील ने कोर्ट से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय की मांग की और गुरुवार तक अपना रुख स्पष्ट करने का आश्वासन दिया।
Delhi आचरण पर उठे सवाल, सॉलिसिटर जनरल ने दी यह दलील
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने घटना के बाद आरोपी के रवैये पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने पूछा कि गिरफ्तारी के वक्त “गिरफ्तारी का आधार” न बताए जाने का तर्क पहले क्यों नहीं दिया गया था।
मेघालय सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने जमानत का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब आरोपी खुद पुलिस के सामने सरेंडर करने आई हो, तो बाद में गिरफ्तारी के कारणों की तकनीकी चूक का बहाना नहीं बनाया जा सकता। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यदि कोई आरोपी स्वयं सरेंडर करता है या रंगे हाथों पकड़ा जाता है, तो गिरफ्तारी की प्रक्रिया में हुई कागजी चूक महज एक लिपिकीय (clerical) त्रुटि होती है, जो मुख्य अपराध की गंभीरता को कम नहीं करती।
Delhi निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया और जांच में सहयोग की आवश्यकता
शीर्ष अदालत की इन सख्त टिप्पणियों से यह साफ है कि गंभीर आपराधिक मामलों में जमानत प्रक्रिया के दौरान आरोपी का आचरण और जांच में सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में सोनम रघुवंशी के वकील द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब के आधार पर आगे का आदेश जारी करेगा।

