रिपोर्टर: विकास सिंह
BRICS Summit : 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंचे। पालम हवाई अड्डे पर उतरते ही उनका रेड कार्पेट बिछाकर भव्य स्वागत किया गया। भारत सरकार की ओर से केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने उनकी आगवानी की। गलवान घाटी में हुई सैन्य झड़प के बाद पिछले 7 वर्षों में चीनी राष्ट्रपति का यह पहला भारत दौरा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
7 साल बाद भारत पहुंचे चीनी राष्ट्रपति, पीएम मोदी से होगी द्विपक्षीय वार्ता
BRICS Summit शी जिनपिंग का यह दौरा बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि वे आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत आए थे। भारत मंडपम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनका औपचारिक स्वागत करेंगे। इस सम्मेलन से इतर दोनों शीर्ष नेताओं के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दोनों नेताओं की मुलाकातें हुई हैं, लेकिन भारतीय सरजमीं पर यह बैठक सीमा विवाद और द्विपक्षीय संबंधों की भावी दिशा तय करने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होगी।
‘एक-दूसरे की कामयाबी में साझेदार बनें’ – चीनी राजदूत का सकारात्मक बयान
BRICS Summit जिनपिंग के आगमन के साथ ही भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग ने दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि चीन दोनों देशों के शीर्ष नेताओं द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन का लक्ष्य भारत के साथ संवाद बढ़ाना, आपसी मतभेदों को परिपक्वता से सुलझाना और एक-दूसरे के विकास में सहायक पड़ोसी के रूप में दीर्घकालिक रणनीतिक संबंध बनाना है।
‘ग्लोबल साउथ’ के लिए BRICS का महत्व और 6 साल बाद सीधी उड़ानों की वापसी
BRICS Summit विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए BRICS एक सशक्त वैश्विक मंच बन चुका है, जो ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को दुनिया के सामने मजबूती से रखता है। आर्थिक नीतियों और वैश्विक शासन में सुधार के लिए यह मंच बेहद प्रभावी साबित हो रहा है। इसी बीच एक और सकारात्मक कदम के तहत ‘चाइना सदर्न एयरलाइंस’ ने ग्वांगझू और दिल्ली के बीच 6 साल से बंद पड़ी सीधी यात्री उड़ानों को फिर से शुरू करने का ऐलान किया है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक और लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ेगा।
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